चंडीगढ़ – भारत सरकार ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ से बेमौसमी बारिश से गेहूँ की फ़सल को पहुंचे नुक्सान की सूरत में गेहूँ की खरीद के मापदण्डों में ढील देने के लिए की गई विनती को स्वीकृत कर लिया है। केंद्र ने बारिश से गेहूँ के दानों की चमक और कुदरती रंग (लस्टर लौस) प्रभावित होने के कारण इस सम्बन्धी शर्तों में अंतिम रिपोर्ट आने तक ढील देने का फ़ैसला किया है। मुख्यमंत्री ने इस सप्ताह के शुरू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर बारिश से किसानों को गेहूँ की फ़सल के हुए नुक्सान के मद्देनजऱ खरीद के नियमों में ढील देने की अपील की थी।मुख्यमंत्री की माँग के प्रति स्वीकृति भरते हुये केंद्र सरकार ने साल 2019 -2020 के रबी मंडीकरण सीजन के दौरान एकसमान मापदण्डों में अस्थायी आधार पर ढील देकर राज्य में से गेहूँ खरीदने का फ़ैसला किया है। गेहूँ की खरीद सम्बन्धी शर्तों में ढील देने का फ़ैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है जो सांझी टीम की अंतिम रिपोर्ट हासिल होने तक जारी रहेगा। यह प्रगटावा करते हुये खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्रालय ने राज्य के खाद्य और सिविल सप्लाईज़ विभाग को अपने फ़ैसले से अवगत करवा दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से गेहूँ की खरीद के लिए फ़सल के दानों का कुदरती रंग और चमक प्रभावित होने (लस्टर लौस) सम्बन्धी शर्तों में ढील देते हुये इसको 10 प्रतिशत तक कर दिया गया है जिस पर कोई वैल्यू कट नहीं होगा। मंत्रालय ने जि़ला आधार पर भी इन शर्तों में ढील देने की आज्ञा दी है जिसके अंतर्गत बठिंडा, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब और फिऱोज़पुर जिलों में 50 प्रतिशत तक जबकि फाजिल्का और होशियारपुर जिलों में 75 प्रतिशत तक की इजाज़त दी गई है।प्रवक्ता ने बताया कि वह दाने जिन की चमक और कुदरती रंग 10 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावित है और सिकुड़े और टूटे दानों की मात्रा 75 प्रतिशत तक है, की खरीद में सीधे तौर पर एक चौथाई वैल्यू कट लगाया जायेगा। जो गेहूँ खऱीदा जायेगा, उसका भंडारण और हिसाब-किताब अलग तौर पर रखा जायेगा। मापदण्डों में ढील देकर खऱीदे गये गेहूँ के भंडारण का अति महत्वपूर्ण पहल के आधार पर निपटारा कर दिया जायेगा।