पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते दबाव से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट पैदा कर सकता है इसका संकेत पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने बयान में दे दिया, कि पाकिस्तान को भारी नुकसान का डर सताने लगा है। आतंक के खिलाफ बढ़ते भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दबाव से पाकिस्तान घिरा हुआ महसूस कर रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान के हुक्मरानों ने ये चिंता जताई है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो पाकिस्तान को जबर्दस्त आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल पाकिस्तान पर आतंक को आर्थिक मदद रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने का ख़तरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसपर चिंता जताई है कि अगर ऐसा हुआ तो इससे पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। कुरैशी ने बताया कि 2018 में पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में डाले जाने के बाद से उसे अब तक दस अरब डॉलर यानी करीब 69 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। FATF की पिछली बैठक में कार्यबल ने पाकिस्तान से उसके देश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखने को भी कहा था। दरअसल एफएटीएफ के एक्सपर्ट की एक टीम ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया था। इस दौरे का मकसद इस बात की पड़ताल करना था कि क्या इस्लामाबाद ने वित्तीय अपराधों के खिलाफ ग्लोबल स्टैंडर्स पर पर्याप्त प्रगति की है, जिससे वो पैरिस स्थित वॉचडॉग की ग्रे लिस्ट से बाहर निकल सके। FATF की टीम ने मार्च के अंतिम सप्ताह में इस्लामाबाद का तीन दिन का दौरा किया था। अगली एफएटीएफ की समीक्षा जून में वॉशिंगटन में होगी और इससे पहले पाकिस्तान को 16 बिंदुओं पर गंभीरता दिखानी होगी। आपको बता दें कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स आतंकवाद के आर्थिक मदद और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने के लिए काम करता है।