नई दिल्ली -केंद्रीय जीएसटी की एंटी इवेशन टीम ने पिछले साल 30 नवंबर को नोएडा गाजियाबाद सहित दिल्ली में 15 ठिकानों पर छापेमारी कर साक्ष्य जुटाए। केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (सीजीएसटी) में 238 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है।
इसमें 1681.61 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जारी कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का लाभ लिया गया। यह बिल दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित मोहित गुप्ता की गुप्ता पैकेजिंग, तनुज गुप्ता की गुप्ता ¨पट्रर्स कंपनी की ओर से जारी किया गया है। इन लोगों ने अपने मित्रों व रिश्तेदारों के नाम पर 70 फर्जी कंपनियां बनाकर इस खेल को अंजाम दिया है। इनका नेटवर्क नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली के साथ ही हरियाणा, आंध्रप्रदेश, कोयम्बटूर, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित देश में कई राज्यों में फैला है।
मामले की पूरी छानबीन के बाद बुधवार को
इसकी जानकारी केंद्रीय जीएसटी के प्रधान आयुक्त ने दी। इस नेटवर्क को
उजागर करने के लिए केंद्रीय जीएसटी की एंटी इवेशन टीम ने पिछले साल 30
नवंबर को नोएडा, गाजियाबाद सहित दिल्ली में 15 ठिकानों पर छापेमारी कर
साक्ष्य जुटाए। इसमें पाया गया कि फर्जी बिल का यह नेटवर्क दोनों कंपनियों
ने देशभर में फैलाया है। इसमें एक भी रुपये का उत्पाद इधर से उधर नहीं किया
गया है। सिर्फ बिल के जरिये सारी चोरी की गई है।
केंद्रीय
जीएसटी के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल नवंबर माह में पता चला कि
नोएडा के सेक्टर-154 स्थित जगदंबा इंटरप्राइजेज की कंपनी की ओर से नियमित
रूप से टैक्स रिटर्न फाइल (जीएसटीआर थ्री बी) नहीं की जा रही थी, लेकिन
जीएसटी आर वन भारी भरकम राशि के साथ जारी हो रहा था। जब उस कंपनी के मालिक
को कार्यालय पर बुलाया गया है तो पता चला कि कंपनी ने सिर्फ जीएसटी नंबर ही
लिया है। उसकी एक जेसीबी है, जो नकद राशि पर अपनी सेवा दे रही है, लिहाजा
इसकी पड़ताल शुरू की गई तो एक के बाद एक कंपनी प्रकाश में आती चली गई।
नेटवर्क
को तोड़कर सरकार का राजस्व खाते में जमा कराने के लिए प्रधान आयुक्त,
केंद्रीय जीएसटी की ओर से सभी राज्यों के जीएसटी कमिश्नर को पत्र लिखा गया
है। इसमें उन कंपनियों के जीएसटी नंबर, जीएसटी धारक का नाम, स्थान की सूची
भी उपलब्ध कराई गई है। इसके बाद पड़ताल जारी रही।