वायु सेना की ताकत में आज और इजाफा हो गया जब चंडीगढ़ एयरबेस पर वायु
सेना में 4 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल हुए। हाई टेक्नोलॉजी से लैस चिनूक
पहाड़ी इलाकों पर भारी सामान ले जाने में सक्षम है, इसे वायुसेना प्रमुख ने
गेम चेंजर बताया है।
भारतीय वायु सेना को आज 4 चिनूक हेलिकॉप्टर
मिल गए हैं। चिनूक एडवांस्ड मल्टी मिशन हेलिकॉप्टर है और करीब 11 हजार किलो
तक के हथियार और सैनिकों को आसानी से लिफ्ट करने की ताकत रखता है। इसके
अलावा ये बेहतरीन मशीन, मानवीय और आपदा राहत अभियान में भी इसका इस्तेमाल
आसानी से किया जा सकता है।
भारतीय वायु सेना को सोमवार को 4 चिनूक
CH-47आई हेलिकॉप्टर मिल गए। चिनूक से भारतीय सेना की ताकत बढ़ेगी न सिर्फ
बढ़ेगी बल्कि राहत अभियानों में इसकी अचूकता नए कीर्तिमान बना सकती है। यह
वर्टिकल लिफ्ट प्लैटफॉर्म हेलिकॉप्टर अमेरिकी सेना के अलावा करीब 26 देशों
में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। और अब ये भारतीय वायुसेना का भी हिस्सा है।
चीनूक को मल्टी-मिशन हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर कहा जाता है, जिससे
सैनिकों, तोपखाना के उपकरणों, गोला-बारूद, रसद को सीधे युद्ध मैदान में
पहुंचाया जा सकता है।
ये ऐसी मशीन है जो हर हालात में, कैसी भी
भौगोलिक परिस्थितियों में सेनाओं का साथ निभाता है। जो चौबीसों घंटे, सातों
दिन, किसी भी मौसम में अपनी भूमिका निभा सकता है।
सैन्य
कार्यवाहियों के अलावा, चिनूक हेलिकॉप्टर प्राकृतिक आपात, मेडिकल आपादा,
खोजी अभियानों और सिविल कार्यों में भरपूर साथ निभाता है।
इस
हेलिकॉप्टर में सैन्य बलों के लिए सैन्य अभियानों के लिए न सिर्फ सारी
सुविधाएं मौजूद हैं, बल्कि इसका कॉकपिट भी पूरी तरह से डिजिटल बनाया गया
है।
चिनूक की क्षमता 11 टन और 45 सैनिकों को ढोने में सक्षम है,
इतना ही नहीं ये 10 टन का अतिरिक्त भार भी उठा सकता है। यहां तक कि चिनूक
M-777 ultra-light howitzers तोपों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता
है।
सितंबर 2015 में कुल 15 चिनूक हेलिकॉप्टर की डील अमेरिकी कंपनी
बोईंग के साथ कुल 8,048 करोड़ रु. में हुई थी, जिसकी पूरी आपूर्ति मार्च
2020 तक होगी।
चार चिनूक हेलिकॉप्टर सोमवार को चंडीगढ़ में
वायुसेना का हिस्सा तो बन गए लेकिन अब राफेल जेट और अपाचे हेलिकॉप्टर का भी
इंतज़ार है। सोमवार को वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि राफाल लड़ाकू विमान
के भारतीय वायुसेना के बेडे में शामिल होने से मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
वही, सोमवार को ही ख़बर आई कि हिंदुस्तान एरोनॉटिकल लिमिटेड यानी
HAL समय सीमा के मुताबिक 31 मार्च तक 16 वें तेजस के निर्माण को पूरा कर
लेगी, जो वायु सेना को मिलने वाले कुल 40 हल्के लड़ाकू विमानों का हिस्सा
होगा। अभी कुछ दिनों पहले ही तेजस को अंतिम परिचालन सर्टिफिकेट मिला है,
जिसके आधार पर होने वाले बदलाव इस साल तक पूरे कर लिए जाएंगे।