चंडीगढ़ – भारतीय चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नामांकन पत्र के हिस्से फार्म नंबर 26 में संशोधन कर दिया गया है और इस संबंधी चुनाव लडऩे के इच्छुक और राजनैतिक पार्टियों की इस संबंधी शंकाओं को दूर करने के लिए इस संबंधी आम तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर जारी किये हैं जोकि आयोग की वैबसाईट पर उपलब्ध है। इस संबंधी जानकारी देते हुये मुख्य चुनाव अधिकारी, पंजाब डॉ. एस. करुणा राजू ने बताया कि भारतीय चुनाव आयोग द्वारा यह फ़ैसला भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल रिट्ट पटीशन नं -784 ऑफ 2015 लोक प्रहरी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और सिविल रिट्ट पटीशन नं 536 ऑफ 2011 पब्लिक इंट्रस्ट फाउंडेशन बनाम केंद्र सरकार और अदरज़ का निपटारा करते हुये सुनाए गए फ़ैसले की रौशनी में किया गया है। इस संशोधन के अनुसार अब लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा चुनाव लडऩे के इच्छुक अपराधी पृष्टभूमि वाले उम्मीदवारों को नामांकन पत्र में अपने पूरे अपराधिक मामलों / जिन मामलों में उनको अदालत द्वारा सज़ा सुनाई जा चुकी है, संबंधी फार्म 26 में पूरी जानकारी देनी पड़ेगी और साथ ही यह जानकारी अखबारों और टी.वी. चैनलों के द्वारा जनता को भी देनी पड़ेगी। जिन अखबारों और चैनलों में यह जानकारी छपाई /चलाई जानी है, उसकी सूची कार्यालय मुख्य चुनाव अधिकारी पंजाब द्वारा तय करके उम्मीदवारों और राजनैतिक पार्टियों को दे दी जायेगी। उन्होंने बताया कि संबंधित राजनैतिक पार्टी और उम्मीदवार द्वारा अलग अलग तौर पर उस क्षेत्र के बड़े अखबारों में तीन-तीन बार 12 फोंट साईज़ में और सही स्थान पर जानकारी छपाई जाये और टैलिविजऩ में भी तीन-तीन बार कम से कम से 7 सेकिंड के लिए चलाई जाये और अक्षर का साईज़ वही रखा जाये जोकि टी. भी के लिए तय मापदंड है, जिससे जिस भावना के साथ यह फ़ैसला लिया गया है उसके साथ ही इसको लागू किया जा लिया सके। इस संबंधी यह भी ध्यान रखा जाये कि नामांकन पत्र वापस लेने का तय तारीख़ 2 मई, 2019 है और वोटें पडऩे का कार्य 19 मई, 2019 को होना है इसलिए अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी जानकारी अखबारों में छपाने की कार्यवाही 22 अप्रैल, 2019 से 17 मई, 2019 तक मुकम्मल की जानी है और यह भी यकीनी बनाना है कि यह अलग-अलग तारीख़ को किया जाये। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि जिस फॉर्मेट में यह छपाया जाना है उसमें उम्मीदवार का नाम, पता और पार्टी का नाम दर्ज करने के लिए कॉलम बने हों। इसलिए इसमें उम्मीदवार के हस्ताक्षर करने की ज़रूरत नहीं क्योंकि विज्ञापन छपाने वाले का नाम घोषणा-पत्र से स्पष्ट हो जायेगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी गलत जानकारी देता है तो उसके खि़लाफ़ जनप्रतिनिधि कानून की धारा 123(4) और भारतीय दंड संहिता की धारा 51 और 171 जी अनुसार कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। डॉ. राजू ने बताया कि यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह विज्ञापन सिफऱ् उन उम्मीदवारों को ही देने की ज़रूरत है जिनके खि़लाफ़ कोई अपराधिक मामला सुनवाई अधीन है या फिर अतीत में किसी मामले में उनको सजा सुनाई जा चुकी है। जिन उम्मीदवारों के खि़लाफ़ किसी तरह का कोई मामला सुनवाई अधीन नहीं है और न ही उनको अतीत में किसी मामले में सजा सुनाई गई है, को यह विज्ञापन देने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि फार्म नंबर -26 आइटम नंबर 5 के तहत दिए गए शीर्षक केस नंबर और केस की स्थिति में केस नंबर और केस संबंधी विवरण देने ज़रूरी है। इसी तरह यदि किसी उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र दाखि़ल करने के बाद उस केस का स्टेटस बदल जाता है तो यह उम्मीदवार की मजऱ्ी है कि उसने नयी स्थिति संबंधी रिटर्निंग अफ़सर को अवगत करवाने के लिए नोटिफिकेशन करना है या नहीं। अखबारों और टी.वी. चैनलों पर अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी जानकारी का प्रचार करने पर आया ख़र्च उम्मीदवार और संबंधित पार्टी द्वारा किया जायेगा और इस ख़र्च को भी चुनावी ख़र्च में भी जोड़ा जायेगा।अखबारों और टी.वी. चैनलों पर अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी जानकारी के प्रचार के दौरान उम्मीदवार द्वारा किये गए दावों के सही होने संबंधी रिटर्निंग अफ़सर नहीं पूछ सकता।सी.ई.ओ. ने बताया कि जो उम्मीदवार अपराधी पृष्टभूमि वाले होंगे वह चुनाव आयोग द्वारा पहले से तय फॉर्मेट में जिस अनुसार यह जानकारी उम्मीदवार द्वारा फार्म सी -4 और राजनैतिक पार्टियां फार्म सी- 5 के द्वारा जिला चुनाव अधिकारी को पेश करेंगी। इसके साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि राजनैतिक पार्टी जिसकी कोई अपराधिक पृष्टभूमि वाला उम्मीदवार, जो चुनाव लड़ रहा है या अपराधिक पृष्टभूमि वाला उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी प्रचार करने संबंधी दिए गए आदेशों की पालना नहीं करता तो चुनाव के उपरांत उसके खि़लाफ़ चुनाव पटीशन या माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनादर का मामला दर्ज करने के लिए आधार बन सकता है। टैलिविजऩ चैनलों पर अपराधिक पृष्टभूमि संबंधी प्रचार करने के लिए समय प्रात:काल 8 बजे से रात 10 बजे तक तय किया गया है और इसकी भाषा स्थानीय या अंग्रेज़ी होगी।