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सौहार्दपूर्ण रही करतापुर गलियारा पर भारत और पाकिस्तान की बैठक

संबंधों में बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर शहर से जोड़ने वाला गलियारा बनाने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के मकसद से अटारी सीमा पर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की बैठक हुई।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एस.सी.एल. दास ने किया जबकि पाकिस्तानी टीम की अगुवाई पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक डॉ. मोहम्मद फैसल ने की। दोनों देशों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में वार्ता की। बातचीत के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि दोनों पक्षों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं और प्रावधानों को लेकर विस्तृत और रचनात्मक बातचीत की और करतारपुर साहिब गलियारे को जल्द चालू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई। बयान के अनुसार दो अप्रैल को अगली बैठक वाघा में आयोजित करने पर सहमति बनी और इससे पहले 19 मार्च को प्रस्तावित जीरो प्वाइंट पर तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक होगी, जिसमें गलियारे के एलाइनमेंट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

बैठक के बाद भारतीय पक्ष ने प्रेस कांफ्रेस कर विस्तार से पूरे मामले में जानकारी दी। कॉरिडोर की सुरक्षा के विषय में गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि कॉरिडोर से आने-जाने वाले श्रद्धआलुओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बैठक में भारत ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह ऐतिहासिक गुरूद्वारे तक जाने के लिए प्रतिदिन 5,000 श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त प्रवेश की सुविधा दे।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर आतंकी हमला होने के बाद पैदा हुए हालात में ये बैठक हुई। हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि इस बातचीत का वार्ता प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं है।

पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए करतारपुर गलियारे का निर्माण करने पर सहमत हुए थे। गुरुद्वारा दरबार साहिब में सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानकदेव ने अपना अंतिम समय व्यतीत किया था। ये कॉरिडोर पाकिस्तानी शहर करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारतीय पंजाब के गुरदासपुर जिले से जोड़ेगा। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पिछले साल 26 नवंबर को गुरदासपुर जिले में करतारपुर गलियारे की आधारशिला रखी थी।

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