प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र और संत
रविदास की जन्मस्थली वाराणसी पहुचे. दिन खास था, संत रविदास जयंती पर
प्रधानमंत्री उन्हें नमन करने संत रविदास मंदिर पहुंचे. गुरु रविदास के
संदेश, जात-पात की राजनीति के खिलाफ, सद्भाव, समानता और सामाजिक समानता को
दोहराते हुए पीएम ने कहा कि जब तक भेदभाव रहेगा, हम एक दूसरे से नहीं जुड़
पाएंगे, समाज में समानता नहीं आएगी. नरेंद्र मोदी ने संत रविदास की जयंती
पर लोगों से जातिगत भेदभाव समाप्त करने और इसे अपने हित में बढ़ावा देने
वालों को पहचानने की अपील की. पीएम मोदी ने कहा कि जातिगत भेदभाव सामाजिक
सौहार्द में एक बाधा है.
भारत के महान संत भक्तिकाल के कवि,
दार्शनिक और समाज सुधारक थे संत रविदास. क्षीरगोवर्धन वाराणसी में
प्रधानमंत्री ने 15वीं सदी के महान संत को जाकर नमन किया. उन्होंने संत की
प्रतिमा पर माथा टेका. इसके बाद पास ही स्थित जनसभा स्थल पर प्रधानमंत्री
ने मंदिर के प्रमुख से मुलाकात की और संत को नमन किया. इस पावन मौक़े पर
रविदास जन्मस्थल के 410 करोड़ की लागत से होने वाले कायाकल्प की शुरुआत भी
हुई.
छुआछूत, रंगभेद, जातिभेद के ख़िलाफ़ रविदास की रचनाओं ने उस
वक़्त समाज का मार्गदर्शन किया. इन रचनाओं को सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ
‘गुरु ग्रंथ साहिब में भी स्थान दिया गया है. उनके उपदेशों का संग्रह
रविदास्सिया में संग्रहित किया गया है. रविदास ने सहिष्णु, सार्वभौम और
कर्म प्रधान समाज की कल्पना की थी. प्रधानमंत्री ने कहा कि महान संत के
दर्शन को मूल मानकर ही केंद्र सरकार लगातार विकास के कार्य कर रही है.
इससे
पहले प्रधानमंत्री ने 2016 में भी रविदास मंदिर आकर दर्शन किया था. ये देश
की समृद्ध विरासत ही है कि समय-समय पर सामाजिक कुरीतियों और विसंगतियों से
बचाने के लिए समाज सुधारक ने जन्म लिया. रैदासियों के बीच प्रधानमंत्री का
जाना और पंगत में बैठ प्रसाद भी ग्रहण करना देश की महान विरासत मानवतावाद
को समृद्ध करने का ही संदेश है.