पंजाब

बेअदबी और पिछली सरकार के झूठे मामलों को तर्कपूर्ण नतीजे पर पहुंचाया जायेगा -राज्यपाल

सियासी मतभेदों के बावजूद राज्य सरकार बदलाखोरी और असहनशीलता न अपनाने के स्टैंड पर दृढ़ रहेगी

चंडीगढ़ – पंजाब के राज्यपाल वी.पी सिंह बदनौर ने पिछली सरकार के दौरान दर्ज किये गए झूठे मामलों और बेअदबी के मामलों की जांच को तर्कपूर्ण निष्कर्ष पर पहुँचाने के लिए राज्य सरकार की वचनबद्धता का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजनैतिक मान्यताओं और विचारधाराओंं की परवाह किये बिना किसी के खि़लाफ़ भी राजसी बदलाखोरी या असहनशीलता न अपनाने की नीति पर डटकर पहरा देती रहेगी।15वीं विधान सभा के तीसरे बजट समागम के दौरान कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की प्राप्तियों के सम्बन्ध में राज्यपाल ने कहा कि पिछले कार्यकाल के दौरान दर्ज झूठे मामलों के विरुद्ध जस्टिस महिताब सिंह गिल के नेतृत्व वाले जांच आयोग की सिफारशों के मुताबिक कार्यवाही शुरू की गई है और इस कार्य को तर्कपूर्ण नतीजे तक ले जाया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजनैतिक मान्यताओं और विचारधाराओं को दरकिनार करते हुए प्रत्येक के लिए उचित और बराबरी वाला व्यवहार करने में विश्वास रखती है। इसने पिछली सरकार के विपरीत किसी के खि़लाफ़ भी झूठा केस दर्ज न करने को भी यकीनी बनाया।इसी तरह श्री बदनौर ने कहा कि राज्य सरकार जस्टिस रणजीत सिंह की अगवाई वाले आयोग की सिफारशों पर कार्यवाही के लिए वचनबद्ध है जिसने वर्ष 2015-16 के दौरान राज्य में धार्मिक बेअदबी के मामलों की जांच की और कानून को मुकम्मल रूप में लागू होने के लिए मंजूरी दी। इस अजीम सदन की तरफ से पिछले सैशन के दौरान की गई सिफारिश के मुताबिक सरकार ने एक विशेष जांच टीम गठित की है और उम्मीद की जाती है कि यह जल्द अपने कार्य को मुकम्मल करेगी।राज्यपाल ने सदन के सदस्यों को बताया कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रोग्राम शुरू किये गए हैं। उन्होंने 26 नवंबर, 2018 को श्री करतारपुर साहिब (पाकिस्तान में) तक कॉरिडोर के नींव पत्थर रखने का स्वागत करते हुये यकीन दिलाया कि राज्य सरकार इस गलियारे को 12 नवंबर, 2019 को आने वाले गुरूपर्व तक चालू करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। श्री बदनौर ने सरकार की तरफ से जलियांवाले बाग़ की शौर्यगाथा की शताब्दी जोकि 13 अप्रैल, 2019 को आ रही है, संबंधी बनाऐ गए प्रोग्राम संबंधी बताया और राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के 150वें जन्म दिवस के समारोहों संबंधी भी जानकारी दी।
आम लोगों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रोग्रामों और नीतियों की प्रगति का जि़क्र करते हुये राज्यपाल ने कहा कि इनकी सफलता हाल ही में सम्पन्न हुये ग्राम पंचायतों, ब्लाक समितियों और जि़ला परिषदों के मतदान के नतीजों से देखी जा सकती है। यह मतदान शांतमई, बड़ी भागीदारी वाले और पूरी रूचि से लड़े गये और राज्य में बुनियादी स्तर पर लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को मज़बूत करने में सहायक हुई हैं। उन्होंने ग्राम पंचायतों, ब्लाक समितियों और जि़ला परिषदों के सभी चुने हुये सदस्यों को बधाई देते हुये उम्मीद जतायी कि वह सभी अपनी जिम्मेदारियों को तनदेही और मेहनत से निभाएंगे।राज्यपाल ने कहा कि वह सभी सदस्यों की तरफ से देश में प्रजातांत्रिक भावनाओं की बड़ी और उच्च परंपराओं को कायम रखने के लिए की गई गतिविधियों की प्रशंसा करते हैं। इन्होंने न केवल इस सदन की शान को बरकरार रखा है बल्कि राजनैतिक मतभेदों के बावजूद एक दूसरे को सम्मान देने के साथ-साथ सौहार्द और भाईचारे को कायम रखा है। हालाँकि मतभेदों को जोशीली प्रजातांत्रिक कार्यपद्धति की कसौटी माना जाता है परन्तु यह ज़रूरी है कि इसका प्रयोग मान के साथ और शिष्टापूर्ण और नि:स्वार्थ भाव से किया जाये। मुझे विश्वास है कि आप सार्वजनिक हित के सभी मुद्दों पर विचार -विमर्श करेंगे और ऐसी स्कीमों और प्रोग्रामों को बनाने में योगदान दोगे जोकि हमारे राज्य को सामाजिक -आर्थिक विकास की ऊँचाईयों की तरफ ले जाएंगे। इससे पहले राज्य में अमन-कानून व्यवस्था को अपनी सरकार की मुख्य प्राथमिकता बताते हुये राज्यपाल ने कहा कि प्रणालियों के सरलीकरण और नीतियों और प्रोग्रामों के पुन: सुधार के द्वारा राज्य सरकार लोगों की इच्छाओं को पूरा करने की तरफ तेज़ी से बढ़ रही है। लोगों के साथ किये गये वायदों की पूर्ति हेतु सरकार ने बहुत से कदम उठाए हैं और गंभीर वित्तीय समस्याओंं के बावजूद सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं की पूर्ति हेतु हर संभव यत्न जारी रखेगी। उन्होंने याद करते कहा कि वास्तव में सरकार को अदायगियों के लिए भारी लम्बित बिलों समेत खाली खज़़ाना विरासत में मिला जिसके नतीजे की वजह से सरकार को अनगिणत चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिस कारण परिस्थितियों पर काबू करने के लिए ज़रूरत से अधिक समय लग रहा है फिर भी राज्य सरकार अपने वायदों के प्रति वचनबद्ध है और राज्य में आम आदमी द्वारा बर्दाश्त की जा रही मुश्किलों को ख़त्म करने के लिए साधन जुटा रही हैं। राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों के समूहों पर नकेल कसने में बड़ी सफलता प्राप्त करने का जि़क्र करते हुये श्री बदनौर ने बताया कि ए-श्रेणी के 10 गैंगस्टरों समेत 1414 गैंगस्टर /अलग -अलग मुजरिम समूहों के सदस्यों को गिरफ्तार करके प्रभावहीन किया गया है। 101 आतंकवादियों और 22 विदेशी तस्करों को गिरफ्तार करके 19 आतंकवादी गिरोहों को ख़त्म किया गया है। उन्होंने कहा कि निरंकारी भवन हमले के दोषियों को भी कानून के कटघरे में खड़ा करके पीडि़तों को भी इन्साफ दिलाने के प्रयास किये गए। राज्यपाल ने अमृतसर में दशहरे के मौके पर घटे रेल हादसे के संकट से निपटने के लिए सिविल सोसाईटियों की सहायता के साथ सरकार के सामथ्र्य और हौंसले का प्रगटावा किया। राज्यपाल ने राज्य को पेश पानी के संकट का विशेष तौर पर जि़क्र किया और इच्छा ज़ाहिर की कि केंद्र सरकार इस समस्या के संदर्भ में अपेक्षित नज़रिया अपनाएगी जिससे राज्य को मरूस्थल होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्रीय अथॉर्टीज़ ने पंजाब को कम पानी वाला राज्य घोषित किया है और यह तथ्य कि राज्य के पास अतिरिक्त पानी नहीं है, पर पूरा ध्यान नहीं दिया गया। राज्यपाल ने बताया कि राज्य सरकार ने पंजाब राज्य में जल-प्रबंध की विस्तृत योजना के लिए इजऱायल की राष्ट्रीय जल एजेंसी मैकरौट के साथ एक करार किया है। राज्यपाल ने पानी के संरक्षण और इसको नियमित करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से लागू की जा रही विभिन्न स्कीमों का जि़क्र करने के अलावा पंजाब के दक्षिण -पश्चिमी जिलों में सेम की समस्या से निपटने के लिए विशेष प्रोग्राम लागू किये जाएँ संबंधी भी बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2019 -20 के अंत तक कंडी नहर पड़ाव -2 प्रोजैक्ट के रहते कामों को मुकम्मल करने का प्रस्ताव रखती है जिसमें लिफ़्ट स्कीमों, बहाव नदियाँ और कमांड एरिया विकास शामिल है। राज्यपाल ने कहा कि सरकार ने शाहपुर कंडी डैम प्रोजैक्ट के निर्माण के उबाऊ और लंबे समय से लम्बित अंतरराज्यीय मुद्दे को निपटाने में सफलता प्राप्त की है और 9 सितम्बर, 2018 को जम्मू और कश्मीर सरकार के साथ एक समझौता किया है। इसी तरह सरकार पानी के बढिय़ा नियंत्रण और संभाल को यकीनी बनाने के लिए राज्य जल अथॉरिटी स्थापित करने का प्रस्ताव रखती है जो उपभोक्ताओं अर्थात किसानों, उद्योगों -व्यापारिक अदारों और विशेषत: ग्रामीण और शहरी परिवारों के अधिकारों की भी मुकम्मल रूप में सुरक्षा को यकीनी बनाऐगी।राज्यपाल ने कहा कि शासन प्रबंध में पारदर्शिता राज्य सरकार की एक अन्य विशेषता है। सिविल और पुलिस प्रबंध के रोज़मर्रा के कामों में ग़ैर-दखलअन्दाज़ी को यकीनी बनाने के अलावा सरकार ने उचित ढांचे की स्थापना के लिए हर संभव कदम उठाए हैं। इसमें हरेक क्षेत्र की नीतियों और प्रोग्रामों का केंद्रीयकरण करना भी शामिल है जिससे सही और उचित प्रणालियों द्वारा शासन प्रबंध को यकीनी बनाया जाये। सरकार द्वारा बहुत सी नीतियों और प्रोग्रामों का केंद्रीयकरण किया गया है, जिनमें व्यापार और औद्योगिक विकास नीति, पर्यटन नीति, सांस्कृतिक नीति, आवास निर्माण और शहरी विकास संबंधी नीति, परिवहन नीति, महात्मा गांधी सरबत विकास योजना, कृषि कजऱ् राहत स्कीम और घर-घर रोजग़ार और कारोबार स्कीम शामिल हैं। इन्होंने राज के प्रबंध को एक ऐसे मार्ग पर लाने में सहायता की है जहाँ से इच्छत उद्देश्य और लक्ष्य स्पष्ट रूप में नजऱ आते हैं।राज्यपाल ने कहा पंजाब में से नशों को ख़त्म करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता हमेशा की तरह मज़बूत और दृढ़ है और इसने नशा समग्गलरों और तस्करों को सरप्रस्ती न देने को यकीनी बनाने के अलावा तीन समर्थकी नीति अर्थात ई.डी.पी. -एंफोर्समेंट, डी -ऐडीकशन और प्रीवैंशन को अपना कर राज्य में नशों के दुरुपयोग को रोकने और ख़त्म करने के लिए अपनी नीति में मुकम्मल सुधार किया है। नशों की सप्लाई को प्रभावशाली ढंग से रोका गया है। एन.डी.पी.एस. एक्ट के अधीन दर्ज किये 21049 मामलों में 25092 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। 556 किलो से अधिक हेरोइन ज़ब्त की गई है। पिछली सरकार द्वारा राज्य के संभावी राजस्व की परवाह किये बिना अंधाधुन्ध सरकारी पैसा ख़र्च करके खज़़ाना खाली करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को पुन: पैरों पर खड़ा करने के लिए मौजूदा सरकार के यत्नों का जि़क्र करते हुये कहा इसके निरंतर यत्नों के नतीजे के तौर पर समय वर्ष 2017 -18 में कम होकर 4175 रुपए पर आ गया है और दिसंबर 2018 में राजस्व प्राप्तियाँ 23 प्रतिशत अधिक हो गई हैं। सरकार द्वारा राज्य का वित्तीय घाटा वर्ष 2016 -17 में जी.एस.डी.पी. के 12.34 फ़ीसदी से घटकर वर्ष 2017 -18 में जी.एस.डी.पी. के 2.65 प्रतिशत पर लाया गया है। राज्य की उदार और तर्कपूर्ण औद्योगिक और व्यापारिक विकास नीति -2017 के नतीजे के तौर पर और उद्योगों के पुर्नोद्धार के कारण राज्य की पूर्ण औद्योगिक बिजली का उपभोग 13 प्रतिशत तक बढ़ गया है। पिछले दो वर्षों के दौरान (दिसंबर 2018 तक) राज्य में एम.एस.एम.ई. इकाईयों की संख्या 10911 से बढक़र 21081, अर्थात दोगुनी हो गई।राज्यपाल ने विस्तार में जानकारी देते हुये बताया कि वर्ष 2007 में जो मुख्य औद्योगिक प्रोजैक्ट रुकावट में आ गए हैं और उत्पादन बंद कर दिया था, को फिर राह पर लाया गया है। मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद नयी औद्योगिक नीति लाई गई जिससे राज्य में निवेश समर्थकी माहौल की सृजना हुई। इस नीति के अंतर्गत उद्योग के लिए बिजली वसूली को पाँच रुपए प्रति यूनिट पर स्थिर किया गया। राज्य का रिअल एस्टेट सैक्टर जोकि मंदहाली की स्थिति में था, को भी फिर उभारा गया। पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य के इंवेस्टमैंट प्रोमोशन विभाग ने विभिन्न निवेशकों के साथ 298 करार किये हैं, इससे 51,339 करोड़ रुपए का निवेश होने की आशा है। राज्यपाल ने कहा इन प्रोजेक्टों के कार्यशील होने से राज्य में एक लाख नौकरियों के सृजन होने की आशा है। राज्यपाल ने बताया कि स्टार्ट-अप हब की स्थापना के लिए विभिन्न करार किये गए और जी.एस.टी. को सफलता से लागू करने के अलावा अन्य प्राप्तियों का जि़क्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भारत सरकार के पास जी.एस.टी. के सरलीकरण के लिए पैरवी करती रहेगी जिससे इसको और भी व्यापारिक और कारोबार समर्थकी बनाया जा सके। राज्यपाल ने कहा कि किसानों का कल्याण उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने खेती कजऱ् राहत स्कीम की सफलता की श्लाघा की जिसके अंतर्गत अबतक 5.83 लाख छोटे और सीमांत किसानों को 4736 करोड़ रुपए की कजऱ् राहत मुहैया करवाई जा चुकी है और 10.25 लाख छोटे और सीमांत किसानों को इस स्कीम अधीन जल्द ही लाया जा रहा है।
श्री बदनौर ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान गेहूँ और धान की निर्विघ्न खरीद को यकीनी बनाते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2015 -16 और 2016 -17 के दौरान 4 सम्बन्धित फसलों में किसानों को अदा किये गये 77,984 करोड़ रुपए के मुकाबले पिछली चार फसलों में 1,00,235 करोड़ रुपए अदा किये गये हैं। इस तरह पिछले दो वर्षों के दौरान 28.5 प्रतिशत का विस्तार हुआ है। किसानों को मुफ़्त और निर्विघ्न बिजली मुहैया करवाने के लिए श्री बदनौर ने अपनी सरकार की वचनबद्धता जतायी। उन्होंने बताया कि सूबे में 14 लाख ट्यूबवैलों के लिए वार्षिक 6250 करोड़ रुपए की अनुमानित सब्सिडी पर मुफ़्त बिजली की सुविधा जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से अनुसूचित जातियों, गरीबी रेखा से निचले और पिछड़ी श्रेणियों के परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ़्त बिजली मुहैया करवाने की सुविधा जारी रहेगी और सरकार ने वार्षिक 3000 इकाइयों की उपभोग की शर्त को भी ख़त्म कर दिया है। फ़सली विभिन्नता और कपास, मक्का, तेल के बीज और दालों के क्षेत्र में वृद्धि करके किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के यत्नों का भी राज्यपाल ने जि़क्र किया। उन्होंने कहा चाहे कि फ़सली विभिन्नता की सफलता केंद्र सरकार की तरफ से न्यूनतम समर्थन मूल्य और इन फसलों की निश्चित रूप से खरीद पर निर्भर करती है परन्तु उनकी सरकार इस मामले को भारत सरकार के सामने बार -बार उठा रही है। यह चिंता वाली बात है कि केंद्र सरकार ने अभी तक इसके प्रति कोई स्वीकृति नहीं भरी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार डेयरी विकास और अन्य सहायक पेशों के निश्चित रूप से मंडीकरण के प्रबंध करके किसानों की सहायता करने के लिए एक व्यापक प्रोग्राम पर विचार कर रही है और यह प्रोग्राम उपेक्षित सरहदी और कंडी क्षेत्रों में ज़ोर -शोर के साथ चलाया जायेगा।राज्यपाल ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा फ़सली अवशेष प्रबंधन के लिए लागू किये प्रोग्रामों का भी जि़क्र किया। इसके साथ ही उन्होंने नयी सरकार के गठन के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े सुधारों संबंधी भी जानकारी सांझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बड़े सहकारी अदारों के उत्पादों को निर्यात करने पर केंद्रित होकर सूबे की सहकारी संस्थाओं में बड़े सुधार करने पर काम कर रही है। पिछले कुछ वर्षोंं के दौरान स्थापित की गई गौशालाओं के प्रबंधन और संचालन में पेश आंकड़ों की तरफ ध्यान दिलाते हुये राज्यपाल ने बताया कि इन गौशालाओं को आत्म-निर्भर बनाने के लिए इनकी संचालन लागतों समेत नयी स्कीम जल्द ही लाई जा रही है। राज्यपाल ने राज्य सरकार के विभिन्न प्रोग्रामों और योजनाओं का जि़क्र करते हुये बताया कि यह कार्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार लाने पर केंद्रित होंगे जिनके अंतर्गत गाँवों की टूटीं लिंक सडक़ों की मुरम्मत और अपग्रेड करना, स्कूलों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे और स्तर को ऊँचा उठाना और विभिन्न यूनिवर्सिटियों के साथ 15 नये डिग्री कालेजों की स्थापना करना शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अध्यापकों की तकलीफ़ों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और उनकी समस्याओं के हल के लिए हर संभव यत्न करेगी। उन्होंने कहा कि सिफऱ् अध्यापक ही नहीं समूचे मुलाजिमों की शिकायतों के निपटारे के लिए सरकार पूरा ध्यान दे रही है और जल्द ही इनका निपटारा प्रभावशाली ढंग से किया जायेगा क्योंकि सरकार नहीं चाहती कि इसके जोशीले कर्मचारियों को किसी भी तरह के नुक्सान का सामना करना पड़े। राज्य के लोगों के लिए सेहत संबंधी उठाये जा रहे कदमों की बात करते हुये श्री बदनौर ने कहा कि राज्य सरकार पंजाब निवासियों को बेहतरीन और वाजिब दरों पर सेहत सहूलतें प्रदान करने के लिए शिद्दत से काम कर रही है और इसी के अंतर्गत राज्य में वैलनैस क्लीनिक खोलने के साथ साथ सेहत बीमा योजना का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिलावटी दूध और दूध से तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों आदि में मिलावटखोरी को रोकने के लिए सरकार की तरफ से शुरू किये मिशन तंदुरुस्त पंजाब ने बड़े स्तर पर काम किया है।श्री बदनौर ने सरकार की तरफ से लोगों की सुविधा के लिए किये जा रहे उपरालों पर प्रकाश डालते हुये बताया कि सरकार ने रियल एस्टेट निवेश, नागरिक सेवाएंं तुरंत और असरदार ढंग के साथ प्रदान करने के लिए ई -गवरनैंस पर विशेष ज़ोर दिया और सरकार ने शहरी वातावरण सुधार प्रोग्राम की शुरुआत, स्मार्ट शहरी, स्मार्ट गाँव मुहिम, शहरी क्षेत्र में विज्ञापन के कार्य मेें सुधार, महात्मा गांधी सरबत विकास योजना, ग्रामीण क्षेत्र में पीने वाले साफ़ पानी की सप्लाई और सफ़ाई प्रबंधन, स्वच्छ भारत -ग्रामीण मिशन को कामयाब ढंग से लागू करने, पिछले दो वर्ष के दौरान व्यक्तिगत लाभपात्रियोंं के लिए 722 करोड़ रुपए की लागत के साथ 4.99 लाख शौचालयों के निर्माण करके राज्य के समूह गाँव को खुले में शौच से मुक्त का दर्जा दिलाया है।उन्होंने राज्य में केंद्रीय स्कीमों को बखूबी ढंग से लागू करने की बात करते हुये कहा कि पंजाब सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत 415 लाख दिहाडिय़ां ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदान की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हाईवेज़ के विकास और रख-रखाव के लिए व्यापक प्रोग्राम बनाया है और पंजाब सामाजिक सुरक्षा फंड कायम करने के साथ साथ आशीर्वाद स्कीम के अंतर्गत अनुदान में विस्तार किया है। अन्य स्कीमों संबंधी जानकारी देते हुये राज्यपाल ने बताया कि पंजाब सरकार ने संगठित बाल विकास सेवाओं (आई.सी.डी.एस) को भी लागू किया है और राज्य स्तर पर पोषण अभियान चलाने के अलावा तरक्कियों में एस.सी. कर्मचारियों के आरक्षण को फिर बहाल किया है।

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