सर्वाइकल कैंसर जिसे गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भी कहा जाता है पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए खतरा बना हुआ है।
नई
दिल्ली- एक स्टडी के मुताबिक, भारत में करीब 50 फीसदी मध्य वर्ग की
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर पॉजिटिव पाया गया है।37 से 45 एज ग्रुप की
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा। पैथोलॉजी लैब एसआरएल
डायग्नॉस्टिक्स की ओर से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए HPV यानी ह्यूमन
पैपीलोमा वायरस जांच के विशलेषण में पता चला है कि 31-45 आयुवर्ग की
महिलाओं में हाई-रिस्क एचपीवी के सबसे ज्यादा 47 फीसदी मामले पाए गए हैं।
यानी इनमें सर्वाइकल कैंसर की आशंका सबसे ज्यादा है। इसके बाद 16-30
आयुवर्ग के 30 फीसदी मामलों में हाई-रिस्क एचपीवी पॉजिटिव पाया गया है।
दास
ने कहा कि ‘सर्वाइकल कैंसर यौन संचारी संक्रमण है, जो विशेष प्रकार के
एचपीवी से होता है। सर्वाइकल कैंसर और प्रीकैंसेरियस घाव के 70 फीसदी
मामलों का कारण दो प्रकार के एचपीवी (16 और 18) होते हैं।’ सर्वाइकल कैंसर
दुनिया भर में महिलाओं में कैंसर के कारण होने वाली मौतों का चौथा सबसे बड़ा
कारण है। इंटरनैशनल एजेन्सी फॉर रीसर्च ऑफ कैंसर द्वारा जारी एक रपट के
अनुसार, इसके मामलों की दर 6.6 फीसदी तथा मृत्यु दर 7.5 फीसदी है।
मानव
विकास सूचकांक में सर्वाइकल कैंसर के मामलों और इसके कारण मृत्यु दर स्तन
कैंसर के बाद दूसरे स्थान पर है। बयान के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर की
स्क्रीनिंग के लिए मुख्य टेस्ट हैं- पारम्परिक ‘पैप स्मीयर’ और ‘लिक्विड
बेस्ड सायटोलोजी टेस्ट’, ‘विजुअल इन्स्पैक्शन विद एसीडिक एसिड’ और ‘एचपीवी
टेस्टिंग फॉर हाई रिस्क एचपीवी टाईप’। एक अनुमान के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर
कम विकसित क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा
कारण है। 2018 में सर्वाइकल कैंसर की वजह से 3 लाख 11 हजार महिलाओं की
मृत्यु हुई, जिनमें से 85 फीसदी से ज्यादा मौतें निम्न और मध्यम आय वर्ग
वाले देशों में हुईं। लेकिन सर्वाइकल एकमात्र कैंसर है, जिसकी रोकथाम संभव
है, अगर शुरुआती स्टेज में इसका पता लग जाए तो।