श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संदर्भ में काली बेईं को वन्य जीव संरक्षण अभयारण्य बनाने के लिए भी मंजूरी
चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लुप्त होने की कागार पर पहुँची ब्यास नदी में पाई गई इंडस रीवर डोलफिन को पंजाब राज्य जलीय जीव घोषित करने की मंजूरी दे दी है। वन्य जीव बारे प्रांतीय बोर्ड की दूसरी मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इंडस डोलफिन एक दुर्लभ जलीय जीव है जो ब्यास नदी के पर्यावरण प्रणाली के संरक्षण के लिए एक उप -जाति होगी। मुख्यमंत्री ने श्री गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक 550वें प्रकाश पर्व के संदर्भ में सेम वाले इलाके कांजली और पवित्र काली बेईं को वन्य जीवों की संरक्षण के लिए अभयारण्य घोषित करने के लिए भी मंजूरी दे दी है। यह पवित्र काली बेईं श्री गुरु नानक देव जी के जीवन के साथ सम्बन्धित है जिनको इस पवित्र बेईं में ज्ञान हासिल हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने से इस क्षेत्र में पर्यावरण के संतुलन को बनाई रखने में योगदान मिलने के साथ-साथ नदी की सफ़ाई भी होगी जो समय के बीतने के साथ दूषित हो गई है। ब्यास नदी में अनियमित पानी के बहाव पर गंभीर नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने 5000 से 6000 क्युसिक पानी का न्यूनतम बहाव यकीनी बनाने के लिए जल स्रोत विभाग को निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने पानी की धारा की लगातारता को बनाए रखने और वन्य जीवों को पेश खतरोंं को ख़त्म करने के लिए भी हुक्म जारी किये हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ब्यास नदी की ऐतिहासिक, सभ्याचार, सामाजिक और धार्मिक महत्ता के मद्देनजऱ इसको विरासती नदी घोषित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के लिए भी मुख्य वन्य जीव वार्डन को निर्देश दिए हैं। ब्यास नदी में घडिय़ाल छोड़े जाने सम्बन्धी प्रोजैक्ट की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने हरीके में कच्छूआ हैचरी स्थापित करने की मंजूरी देने के अलावा ब्यास नदी में और घडिय़ाल छोड़े जाने को भी मंजूरी दे दी है जिससे इन उच्च दुर्लभ जातियों के संरक्षण को यकीनी बनाया जा सके। शिवालिक और इसके आस-पास सेम वाले क्षेत्रों में इकौ -टूरिज्म को विकसित करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र में निजी तौर पर काम करने वाली प्रमुख हस्तियों के साथ तालमेल के द्वारा कर्नाटक मॉडल के जंगल लॉज़ लागू करने के लिए वन्य जीव विभाग को कहा है। उन्होंने प्रिंसीपल चीफ़ वन्य जीव वार्डन और डायरैक्टर पर्यटन और एम डी पंजाब राज्य वन निगम पर आधारित एक समिति का भी गठन किया है जो समूचे मामलों का जायज़ा लेगी और 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। शाला पत्तन वैटलैंड गुरदासपुर के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध पर्यावरण माहिर रीमा ढिल्लों की तरफ से जताई गई चिंता के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने सूबे के वन्य जीव विभाग और वाइल्ड लाईफ़ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून को मिलकर एक कार्य योजना तैयार करने के लिए कहा है। जंगली सूअरों की बढ़ रही संख्या पर गंभीर नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने सूबे में जंगली सूअरों की संख्या के लिए विशेष गणना कराने के लिए वन्य जीव विभाग को कहा है। जिन क्षेत्रों में जंगली सूअर किसानों के लिए समस्या पैदा करते हैं और इनके शिकार के लिए ऑनलाइन पर्मिट देने के लिए मोबाइल एप भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने वेटनरी के प्रयोग के लिए ऐकलोफिनक ड्रग पर पाबंदी बारे अपनी सरकार के फ़ैसले का भी ऐलान किया जिससे गिद्धों का संरक्षण किया जा सके। उन्होंने यह मुद्दा भारत सरकार के पास उठाने के लिए भी डायरैक्टर पशु पालन विभाग को कहा।वन्य जीव और पर्यावरण के संरक्षण के लिए विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए मुख्यमंत्री ने वन्य जीवों बारे विषय पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को कहा है। उन्होंने चिडिय़ा घरों और अन्य वन्य जीवों से सम्बन्धित सैंक्चयूरियों में जाने वाले विद्यार्थियों को फंड देने के लिए तौर-तरीके ढूँढने के लिए भी वित्त विभाग को कहा है। राज्य में आवारा कुत्तों की समस्या पर गहरी चिंता प्रकट करते मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अब लोगों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती देने लग हैं। इस समस्या को पहल के आधार पर हल करने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वन्य जीव विभाग को पशु पालन विभाग के साथ मिलकर रूप रेखा तैयार करने के लिए कहा है जिससे आवारा पशुओं को उन बीड़ों में तबदील किया जा सके जो वन्य जीव सैंकच्यूरियां नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने वन्य जीव और वैटलैंड व वन और बीड़ मोती बाग़ वाइल्ड लाईफ़ सैंक्च्यूरी की बहाली के लिए अलग डायरैक्टोरेट गठित करने से सम्बन्धित कुछ मुद्दों का जायज़ा लेने के लिए मेजर ए.पी.सिंह, हरदित्त सिंह सिद्धू, कर्नल पी.एस ग्रेवाल और जसकरन सिंह समेत वन्य जीव प्रांतीय बोर्ड के प्रसिद्ध सदस्यों और वन्य जीव विभाग के अधिकारियों पर आधारित एक कमेटी का भी गठन किया है जिससे विभिन्न वन्य जीव जातियों को रहने के लिए कुदरती स्थान मुहैया हो सके और उनका ग़ैर -कानूनी शिकार रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने छत्तबीड़ चिडिय़ा घर में जानवरों की विभिन्न नस्लों को लाने के लिए अफ्रीकी देशों से ज़ैबरा, जिराफ, चैंपांजी और गोरीला जैसे जीवों को आयात करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए वन्य जीव विभाग को आज्ञा दे दी है। वन्य जीव विभाग की विनती को स्वीकृत करते हुए मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव वन को कहा है कि वह छत्तबीड़ चिडिय़ घर से पैदा होता राजस्व राज्य के खजाने की जगह पंजाब ज़ूज़ डिवैल्पमैंट सोसाइटी को तबदील करने सम्बन्धी व्यापक प्रस्ताव उनके पास भेजें जिससे चिडिय़ा घरों के कामकाज को निर्विघ्न चलाया जा सके और वन्य जीवों का अच्छा संरक्षण हो सके। मीटिंग में वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, विधायक इन्दरबीर सिंह बुलारिया और कुशलदीप सिंह ढिल्लों, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन रौशन सुंकारिया, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तेजवीर सिंह, मुख्य वन्य जीव वार्डन डा. कुलदीप कुमार, पीसीसीएफ जतिन्दर शर्मा, डायरैक्टर मछली पालन डा. मदन मोहन और डायरैक्टर पशु पालन डा. इन्द्रजीत सिंह और वाइल्ड लाईफ़ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया डा. अनिल भारद्वाज उपस्थित थे। ग़ैर -सरकारी सदस्यों में निरवीर काहलों, रुपिन्दर संधू और विश्वदेव सिंह शामिल थे।