चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर ने अमृतसर में पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ हौर्टिकल्चर रिर्सच एंड एजुकेशन (पी.जी.आई.एच.आर.ई.) की स्थापना संबंधी प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी के लिए कृषि और किसान कल्याण केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव स्वीकृत करने के बाद पी.जी.आई.एच.आर.ई. स्थापित करने के लिए अटारी, अमृतसर में 100 एकड़ और अबोहर में 50 एकड़ और ज़मीन तबदील कर दी है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2015 -16 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए पंजाब के अमृतसर में पी.जी.आई.एच.आर. ई. स्थापित करने का ऐलान किया था। इसके बाद डायरैक्टर ऑफ एग्रीकल्चर रिर्सच एंड एजुकेशन (डी.ए.आर.ई.)/इंडियन काऊंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिर्सच (आई.सी.ए.आर.) की टीम ने अमृतसर -अटारी राजसी मार्ग पर 25-30 एकड़ अतिरिक्त फ़ाल्तू ज़मीन एडमिनिस्टरेटिव कम अकादमिक कैंपस और विद्यार्थी होस्टल स्थापित करने के लिए शिनाख़्त की थी। परन्तु बार-बार पत्र लिखे जाने और निजी पहुँच करने के बावजूद डी.ए.आर.ई. /आई.सी.ए.आर. द्वारा कोई भी पुष्टि नहीं की गई जिससे पंजाब सरकार इस गौरवमयी प्रोजैक्ट को शुरू करने हेतु यह बहुत ही महँगी ज़मीन को प्राप्त करने के समर्थ हो सकती। मंत्री के निजी दख़ल की माँग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित अत्याधुनिक बाग़बानी, अनुसंधान और शिक्षा इंस्टीट्यूट को बिना किसी देरी से अमल में लाना चाहिए क्योंकि यह देश और राज्य के हित में है। उन्होंने कहा कि यह इंस्टीट्यूट किसानों को रिवायती कृषि से बाग़बानी की तरफ मोडऩे के लिए सहायक होगा और इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।