चंडीगढ़ – पंजाब सरकार की तरफ से राज्य की औद्योगिक इकाईयों को सब्सिडी दी जायेगी जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इस फ़ैसले से राज्य के नौजवानों के लिए रोजग़ार के अधिक मौके भी पैदा किये जा सकेंगे।पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री श्री सुन्दर शाम अरोड़ा ने यह खुलासा करते हुए बताया कि पंजाब सरकार राज्य में उद्योग को बढ़ावा देने और उद्योग की मज़बूती के लिए सहायता देने का फ़ैसला किया है और यह सहायता सब्सिडी के रूप में की जायेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस उद्देश्य के लिए 2 करोड़ की राशि जारी कर दी है।श्री अरोड़ा ने बताया कि चालू हालत वाली साधारण औद्योगिक इकाईयों को सब्सिडी देने के लिए 7 करोड़ रुपए की राशि जल्द मुहैया करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जो औद्योगिक इकाईयाँ सब्सिडी की राशि के लिए अपने आप को योग्य समझती हैं, श्री अरोड़ा ने बताया कि उक्त के अलावा सरकार की तरफ से यह फ़ैसला भी लिया गया है कि जो इकाईयाँ किसी कारण बंद हो चुकी हैं और अपने प्राथमिक स्थान से तबदील हो चुकी हैं या किसी कारण बिक चुकी हैं, पारिवारिक झगड़े या किसी अन्य कारण से उनके मैनेजमेंट में कोई तबदीली हुई है, यदि ऐसी इकाईयों के संविधान में कोई तबदीली नहीं आई है और उनका बैंक खाता उसी तरीके से चल रहा है तो भी ऐसी इकाईयाँ सब्सिडी के लिए हकदार हैं।उद्योग और वाणिज्य मंत्री ने आगे बताया कि पंजाब सरकार की तरफ से औद्योगिक नीति 1992, 1996 और 2003 के अंतर्गत समय -समय पर स्वीकृत की सब्सिडी की राशि जारी नहीं की गई थी क्योंकि पिछली सरकार की तरफ से बंद इकाईयों को सब्सिडी की राशि जारी न करने का फ़ैसला लिया गया था। उन्होंने बताया कि उद्योगपति इस फ़ैसले से सहमत न होने के कारण अपनी इकाईयाँ पंजाब से तबदील करके दूसरे पड़ोसी राज्यों में लेकर गए थे, क्योंकि उनकी बंद इकाईयों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की तरफ से उनकी कोई वित्तीय सहायता नहीं की गई। उन्होंने बताया कि औद्योगिक इकाईयों लिए गए कर्जों के बोझ को बर्दाश्त कर न सकीं और लाखों के लिए गए कजऱ्े ने करोड़ों का रूप धारण कर लिया। उन्होंने बताया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली मौजूदा पंजाब सरकार की तरफ से इन उद्योगपतियों की समय -समय पर मुश्किलों को सुना गया और औद्योगिक एवं विकास नीति -2017 को लागू किया गया।