ब्रिटेन में ब्रेग्जिट डील गिरने के कारण संकट में आई थेरेसा मे सरकार
को बुधवार देर रात बड़ी राहत मिली। सरकार के खिलाफ ब्रिटिश संसद में लाया
गया अविश्वास प्रस्ताव देर रात 1:30 बजे 19 मतों से गिर गया। प्रधानमंत्री
थेरेसा की ब्रेग्जिट डील खारिज होने के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ
अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इस पर वोटिंग हुई। अविश्वास प्रस्ताव के
पक्ष में 306 वोट और विरोध में 325 वोट पड़े। हाउस ऑफ कॉमन्स में 650 सदस्य
हैं।
यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की प्रक्रिया को सिरे चढ़ाने
को लेकर ब्रिटेन में राजनीतिक सरगर्मियां जोरों पर हैं। ब्रेक्जिट को लेकर
टेरीजा मे ने यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे मंजूरी
दिलवाने वे संसद गईं और संसद ने उस समझौते को सिरे से खारिज कर दिया।
समझौते के पक्ष में हाउस ऑफ कॉमंस में 202 वोट आए तो 432 सांसदों ने इसका
विरोध किया।
ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में कभी भी कोई सरकार इतने
बड़े अंतर से नहीं हारी। टेरीजा मे की मुश्किलों का अंत यहीं नहीं हुआ, इस
ऐतिहासिक हार के बाद विपक्षी लेबर पार्टी ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
भी पेश किया। बहुत कम अंतर से वे अविश्वास प्रस्ताव जीत गईं, लेकिन इन
घटनाओं से यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की डेडलाइन 29 मार्च, 2019
आगे खिसक सकती है। अब प्रधानमंत्री विभिन्न राजनीतिक दलों से बात कर रही
हैं और जल्द ही दूसरा मसौदा पेश करेंगी।
ब्रिटिश एक्जिट (ब्रिटेन का
बाहर होना) का संक्षिप्त रूप ब्रेक्जिट है। यूरोपीय संघ (ईयू) 28 देशों का
एक ऐसा संघ है जिसमें सभी देश एक दूसरे से कारोबार करते हैं और किसी के
नागरिक को कहीं भी बसने और काम करने की सहूलियत है। दुनिया की 7.3 फीसद
आबादी और करीब एक चौथाई जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी है। 1973 में ब्रिटेन
इसका सदस्य बना था।