नई दिल्ली उद्योग में बिजली की उच्च लागत कम करने के लिए नई औद्योगिक नीति एक अहम सुझाव दे सकती है। माना जा रहा है कि नई औद्योगिक नीति किसानों और गरीब परिवारों को सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराने के लिए आधार के उपयोग का सुझाव दे सकती है। साथ ही वितरण कंपनियों के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए उनकी लिस्टिंग का सुझाव भी दिया जा सकता है। यह जानकारी सूत्रों के जरिए सामने आई है।भारत में बिजली की कीमत 8 रुपये यूनिट है जो कि अन्य विकसित राष्ट्रों एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी ज्यादा है और मेक इन इंडिया के प्रोत्साहन के मद्देनजर इसे नीचे लाया जाना काफी जरूरी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, जो कि 1991 की नीति को बदलने के लिए एक नई औद्योगिक नीति पर काम कर रहा है विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ व्यवसाय को और आसान करने के लिए बिजली लागत को कम करने के लिए उत्सुक है।प्रस्तावित नीति का उद्देश्य उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देना और मौजूदा उद्योगों का आधुनिकीकरण करना है। यह विनियामक बाधाओं को दूर करने और रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उच्च प्रौद्योगिकियों को अपनाने को भी प्रोत्साहित करेगा।सूत्रों का कहना है, “ये पहल उद्योगों के लिए बिजली की लागत को तर्कसंगत बनाने में मदद करेंगी।” गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने अगले दो दशकों तक नौकरियां पैदा करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति का मसौदा तैयार किया था।