पंजाब

चौथा मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल: सैशन के दौरान चीन की विस्तारवाद नीति, बी.आर.आई. और भौगोलिक क्षेत्र में रणनीतक बदलाव सम्बन्धी विषय पर हुई चर्चा

चीन का बी.आर.आई. वाला हथकंडा कजऱ्दार सरकारों पर काबिज होने का ढंग
चंडीगढ़ – चौथे मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल (एम.एल.एफ.) के दौरान भौगोलिक क्षेत्र में रणनीतक बदलाव संबंधी जानकारी से भरपूर चर्चा देखने को मिली जिसमें चीन की विस्तारवादी नीति और बैल्ट एंड रोड इनीशीएटिव (बी.आर.आई.) जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।रक्षा माहिरों में शामिल राजदूत गुरजीत सिंह, लैफ्टिनैंट जनरल पी.एम बाली और ब्रिगेडियर प्रवीण बद्रीनाथ ने इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया जबकि मेजर जनरल अमृतपाल सिंह ने सैशन का संचालन करते हुए चर्चा के दौरान अपने कीमती विचार पेश किये।लैफ्टिनैंट जनरल पी.एम बाली ए.वी.एस.एम., वी.एस.एम. ने कहा कि पिछले तीन दशकों के दौरान चीन का रणनीतक विस्तार देखने को मिला है, जिसने दुनिया की आर्थिकता के हिसाब से भौगोलिक क्षेत्र में बदलाव करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय माहिरों के डर के मद्देनजऱ चीन ने बी.आर.आई. के द्वारा मेज़बान देश की आर्थिकता हथियाने में अपनी जीत दर्ज की है। बी.आर.आई. के अंतर्गत सहमत देश लम्बे समय के पूँजी लाभ होने का दावा करते हैं, विशेष कर समुद्री प्रोजेक्टों में परन्तु इसकी तरफ ध्यान देने की ज़रूरत है।पूर्व भारतीय राजदूत गुरजीत सिंह ने कहा कि ब्रिटिश काल के दौरान चीन तिब्बत के साथ घिरा हुआ था। परन्तु अब कनेक्टीवीटी और प्रौद्यौगिकी स्वरूप दुनिया समतल हो गई है। चीनी अब बड़ी मात्रा में रेलवे और पोर्टों के द्वारा संपर्क बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पैसों के दम पर चीन सडक़ों का निर्माण कर रहा है।बहुत प्रभावी बी.आर.आई. प्रोजैक्ट के बावजूद चीन अपने घरेलू बाज़ारों को बनाए रखने में असफल रहा है और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को गंभीर आर्थिक झटके मिले हैं, जहाँ कोरोना के समय यह बी.आर.आई. प्रोजैक्ट आरंभ किए गए हैं, जहाँ चीन ने कच्चा माल उठाने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि चीनी आर्थिक योजनाएं खतरे से भरी हैं। यह आर्थिक योजनाएँ नहीं बल्कि रणनीतक प्रोजैक्ट हैं जो समय के अनुरूप सही नहीं हैं। उन्होंने रूस-चीन संबंधों पर भी ध्यान दिलाया।ब्रिगेडियर प्रवीण बद्रीनाथ ने हार्टलैंड थ्यूरी सम्बन्धी चीनी दृष्टीकोण बारे बात की। उन्होंने कहा कि बी.आर.आई. कोरीडोरों के द्वारा छोटे देश चीन के सडक़ीय प्रोजेक्टों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि पिछले कुछ दशकों से घट रही घटनाएँ यह दिखाती हैं कि चीन धीरे धीरे कजऱ्े की लपेट में फंसे देशों की तरफ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि रूस ने जो करना चाहा था चीन वह करने में सफल रहा। चीन के मैरीटाईम सिल्क रूट इसके बी.आर.आई रास्ते के पूरक हैं। बी.आर.आई. के द्वारा चीन अफ्रीका के बुनियादी ढांचे में बड़ा योगदान डालता रहा है।

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