कोरोना के वैक्सीन को लेकर देश और दुनियाभर से अच्छी खबर आ रही है। अब धीरे धीरे लोगो को भी उम्मीद जगने लगी है।बात अपने देश की करें तो भारत बॉयोटेक और आईसीएमआर की ओर से बन रहे देश के पहले स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन का फेज 3 ट्रायल चल रहा है। देश में विकसित कोरोनावायरस के इस वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण दिल्ली के एम्स में भी शुरू हो गया है। एम्स में पहले दिन चार वरिष्ठ डॉक्टर को टीके दिए गए हैं। आने वाले दिनों में एम्स में डेढ़ हजार स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन दिया जाएगा। भारत बॉयोटेक देश के 22 साईट पर छब्बीस हजार लोगो पर फेज 3 का ट्रायल कर रहा है। कोवैक्सीन का दो डोज लगता है। ये वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है।अगर पूरी दुनिया की बात करे तो ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन कोविशिल्ड का परीक्षण भी अंतिम चरण में है। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविशिल्ड का भारत मे फेज 3 ट्रायल सीरम इंस्टिट्यूट के जरिए हो रहा है। भारत मे इसका ट्रायल अंतिम चरण में है। सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि ऑक्सफोर्ड का वैक्सीन कोविशिल्ड जल्द ही आ जायेगा जो काफी सस्ता भी होगा और जो 70 फीसदी तक कोरोना से बचाव में प्रभावी होगा। सीरम इंस्टीट्यूट के मुताबिक अब तक इस वैक्सीन का 40 मिलियन डोज तैयार कर लिया गया है। सीरम दिसंबर में वैक्सीन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के पास इमरजेंसी लाइसेंसिंग के लिए आवेदन करेगा। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि ठीक एक महीने बाद इमरजेंसी लाइसेंस मिल जाएगा। उसके बाद ये वैक्सीन आम लोगो के लिए उपलब्ध होगा। इस वैक्सीन का दो डोज लगेगा। दोनों डोज के बीच 28 दिन का अंतराल रहेगा। ये वैक्सीन इंजेक्शन के जरिए दिया जाएगा। भारत मे पांच वैक्सीन पर काम चल रहा है। जिनमे दो वैक्सीन का फेज 3 ट्रायल चल रहा है। अमेरिकी कंपनी फाईजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक द्वारा तैयार किए जा रहे टीका के बारे में दावा किया गया था कि 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की रक्षा करने में यह 94 प्रतिशत तक असरदार रहा है। कंपनी ने कहा था कि परीक्षण से संकेत मिला है कि यह टीका सभी उम्र, नस्ल के लोगों पर समान रूप से कारगर सिद्ध रहा है। इससे पहले अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना के वैक्सीन ट्रायल के शुरुआती नतीजों के बाद दावा किया था कि कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ सुरक्षा देने वाली नई वैक्सीन 95 फ़ीसदी तक कामयाब है। वहीं मॉडर्ना वैक्सीन को स्टोर करने के लिए माइनस 20 डिग्री और फाइज़र वैक्सीन के लिए माइनस 70 से 80 डिग्री तापमान की ज़रूरत पड़ेगी। वही रूस की वैक्सीन स्पूतनिक 5 का भी भारत मे फेज 2 और फेज 3 ट्रायल चल रहा है। स्पूतनिक 5 के बारे में भी दावा किया जा रहा है कि ये 90 फीसदी से ज्यादा कारगर है. वैसे दुनिया भर में 9 वैक्सीन कैंडिडेट आगे चल रहे है। सभी के अपने अपने दावे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अलावा दुनिया भर के देशों की नजर वैक्सीन के विकास पर है। जैसे ही वैज्ञानिकों की तरफ से हरी झंडी मिलेगी वैक्सीन लोगों को लगना शुरू हो जाएगा। यही नही वैक्सीन का उत्पादन भी साथ ही साथ चल रहा है। भारत सरकार की नजर दुनिया के सभी वैक्सीन पर है। इसके साथ ही सरकार में उच्च स्तर पर वैक्सीन पर नजर रखी जा रही है। भारत ने वैक्सीन देने की सभी जरूरी तैयारी कर ली है। सभी राज्यो से डाटा मंगा लिया गया है। प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और सीनियर सिटिजंस यानी 65 साल से ऊपर के लोगो को वैक्सीन देने की तैयारी है। शुरुआत में करीब 3 करोड़ लोगों की पहचान की गई है जिनको टीका दिया जाएगा। जुलाई 2021 तक करीब 20 से 25 करोड़ लोगों को वैक्सीन दिया जाएगा। इसके लिए एक डिजिटल प्लेटफार्म बनाया जा रहा है जिसके जरिए कोविड टीकों के स्टॉक और डिस्ट्रीब्यूशन/वैक्सीनेशन को ट्रैक किया जाएगा।