अमेरिका और तालिबान के बीच आज दोहा में एतिहासिक शांति समझौते पर दस्तखत होने जा रहे हैं। इससे अफगानिस्तान में तैनाती के करीब 18 साल बाद अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ होगा।कतर में भारत के राजदूत पी कुमारन उस समारोह में हिस्सा लेंगे जिसमें अमेरिका और तालिबान शांति समझौते पर दस्तखत करेंगे। यह पहला मौका होगा जब भारत तालिबान से जुड़े किसी मामले में आधिकारिक तौर पर शामिल होगा। इस अहम समझौते पर हस्ताक्षर से एक दिन पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला कल काबुल पहुंचे।विदेश सचिव ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री हारून चाखनसुरी और वहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बातचीत की और इस दौरान उन्हें शांति समझौते को लेकर भारत के नजरिये के साथ ही उसके चहुंमुखी विकास को लेकर उसकी प्रतिबद्धता की भी जानकारी दी। अफगानिस्तान में शांति और सुलह प्रक्रिया का भारत एक अहम पक्षकार है।