पंजाब

डिजिटल दुनिया मे भारत के डिजिटल कदम

आज जब इंटरनेट और मोबाइल के क्षेत्र के मासिक या सालाना आंकड़े जब जारी होते हैं तो भारत हर बार अव्वल देशों की श्रेणी में दिखाई देता है इतनी बड़ी जनसंख्या वाले इस देश ने सोशल नेटवर्किंग, ऑनलाइन मनोरंजन, ई-कॉमर्स, मोबाइल एप, आदि में अपनी जगह बना ली है और एक सर्वे के अनुसार 56 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन बाजार है ऐसा माना जाता है कि 2021 तक देश के लगभग 70 करोड इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे जब देश में इंटरनेट की पहुंच तेजी के साथ बढ़ रही हो और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इंटरनेट पर आधारित सेवाओं का बोलबाला हो तो स्वाभाविक है कि देश के लिए डिजिटल साक्षरता को प्राथमिकता देना जरूरी हैइंटरनेट पर उपलब्ध सेवाओं का दायरा इतना व्यापक है कि हमारे जीवन को विभिन्न प्रकार से प्रभावित कर रही है लोग इंटरनेट पर जानकारी खोजते हैं इंटरनेट पर मनोरंजन की तलाश करते हैं साथ ही साथ ऑनलाइन खरीदारी भी करते हैं और अपने व्यापार को बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह के विज्ञापन नेट के माध्यम से ही करते हैं सरकारी सेवाओं तथा निजी क्षेत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग भी इंटरनेट के द्वारा ही किया जाता है हमारी सरकारें भी डिजिटल शिक्षा को बेहतर बनाने के प्रयास में जुटी हुई है भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया के तहत अधिक कार्यक्रम चलाएं हैं और इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें से राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन, प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान, और सामान्य सेवा केंद्रों जैसे सीएससी आदि जो कि देश की डिजिटल शिक्षा में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैंवर्तमान में किसी भी क्षेत्र में एक बुनियादी जरूरत बन गई है इंसान की कंप्यूटर, मोबाइल इंटरनेट और उससे जुड़े उत्पाद और सेवाएं हर व्यक्ति के लिए इतनी जरूरी बन गई है कि किन परिस्थितियों में डिजिटल माध्यमों का ज्ञान सिर्फ व्यक्ति के लिए निजी स्तर पर ही आवश्यक नहीं रह गया है बल्कि वह सरकारी योजनाओं तथा लक्ष्य में भी शामिल है इसके अलावा हम मोबाइल बैंकिंग की बात करें तो भारत के 70 % लोग मोबाइल वॉलेट पेटीएम, फोनपे , गूगलपे , आदि का उपयोग करते हैं तथा भारत सरकार द्वारा चलाया गया भीम यूपीआई को भी महत्व देते हैं।डिजिटल विशेषज्ञों के अनुसार 2022 तक 26 अरब या इससे अधिक सेंसर और उपकरण इंटरनेट से जुड़े होंगे जो हमें मशीन इंटेलिजेंस के युग में ले आएंगे बदलाव सिर्फ तकनीकों के संदर्भ में नहीं आ रहे हैं बल्कि डिजिटल शिक्षा के प्रसार के माध्यमों की दृष्टि से भी आ रहे हैं 2014 में शिक्षा पर नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में केवल 6% ग्रामीण परिवारों के पास कंप्यूटर तक पहुंच थी यदि हम कंप्यूटर को ही प्रदान रूप से डिजिटल शिक्षा का माध्यम बनाते हैं तो देश के अधिकांश ग्रामीण जनसंख्या के डिजिटल रूप से निरक्षर होने की संभावना है लेकिन स्मार्टफोन के लोकप्रिय होने के बाद कंप्यूटर डिजिटल साक्षरता का प्रधान माध्यम नहीं रह गया है अब हम सुविधाजनक रूप से यह मान सकते हैं जिनके पास कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है उनके पास भी मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुंच है इसके साथ-साथ कुछ समस्याएं भी आ रही है बचपन में इंटरनेट के उपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति के साथ दुखी आक्रामक व्यवहार करने वाले और चिंतित बच्चों में वृद्धि हुई हैं जो बहुत ही चिंताजनक है एक सामाजिक संगठन के हालिया रिपोर्ट के अनुसार छात्रों को डिजिटल तरीके से रहने तथा व्यवहार करने का सही तरीका सिखाना अब पढ़ना लिखना बोलना सिखाने जितना ही महत्वपूर्ण है हालांकि इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें सिर्फ इसका इस्तेमाल नहीं करना आना चाहिए बल्कि सही ढंग से इस्तेमाल करना आना चाहिए विशेषकर छोटे बच्चों के लिए।इसके अलावा अगर हम गांव की बात करें तो गांव को विभिन्न प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सामान्य सेवा केंद्र सीएससी अब एक संपर्क बिंदु के रूप में कार्य कर रहे हैं और ग्राम पंचायत स्तर पर 2.11 लाख सीएससी कार्यरत हैं लगभग 360 सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं बैंकिंग, पेंशन, डिजिटल साक्षारता, ओर टेलिमेडिसिन, जैसी सुविधा अब ग्रामीण क्षेत्रो के साथ ही दुर्गम इलाकों में अपनी पैठ बना चुकी है इन सुविधाओ के लाभ के साथ ग्रामीणों के साथ डिजिटलिकरण का काफी जुड़ाव हुआ हैं ओर इससे जुड़ी सरकारी योजनाओ का लाभ भी लोगो को डिजिटल माध्यम से मिलने के कारण गावों मे डिजिटल तरक्की हुई हैं भारत सरकार ने किसानो के लिए जो भी योजनाए जारी की हैं उनका डिजिटल होने से हमारे देश की खेती मे भी डिजिटल प्रभाव की झलकी दिखने लगी हैं वास्तव में हमें एक ऐसे समाज और राष्ट्र का निर्माण करना है जिसके नागरिक डिजिटल नागरिक भी हो डिजिटल नागरिक से तात्पर्य ऐसे लोगों से हैं जिनके पास डिजिटल माध्यमों का अच्छा ज्ञान और उपयुक्त कौशल हो जो दूसरों के साथ संवाद करने सामाजिक वातावरण और समाज में भाग लेने के लिए प्रभावी रूप से डिजिटल मीडिया और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में सक्षम भी हो और ऐसा करते भी हो। डिजिटल नागरिकता उस प्रवृत्ति की ओर भी संकेत करती है जिसमें तकनीक के प्रति आशंका या भय नहीं है बल्कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण तथा आत्मविश्वास है हमारें इन्ही प्रयासो ओर सफलतों से अपने राष्ट्र को अन्य विकसित देशो की तुलना कर सर्वश्रेष्ट साबित करने मे सफल रहेंगे.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

seventeen − 14 =

Most Popular

To Top