मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान 70 से अधिक लोगों ने अंग दान के भरे प्रण पत्र
चंडीगढ़ – यहाँ लक क्लब में मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मैडीकल एजुकेशन एंड रिर्सच (पीजीआईएमईआर) की क्षेत्रीय अंग और टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (रोटो) के नेतृत्व में एक आदर्श योग्य शख्स, जिसने अपने 22 सालों के पुत्र की दिमाग़ी तौर पर मौत (ब्रेनडैड्ड) के बाद उसके अंग दूसरों को दान कर कई जीवन बचाए थे, ने लोगों को अंगदान जैसे उत्तम कार्य के लिए प्रेरित किया।मार्च 2013 में एक सडक़ हादके के बाद पर्थ गांधी नाम के नौजवान को डॉक्टरों ने दिमाग़ी मृत करार दिया तो उसके पिता संजय गांधी ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए अपने पुत्र के अंग अन्य लागों के जीवन बचाने के लिए के दिए, जिसमें उसका दिल, जिगर, दोनों गुरदे, अग्न्याशय शामिल थे। इस दौरान मिलिट्री फेस्टिवल पर आने वाले लोगों को संजय गांधी अंगदान के लिए प्रेरित करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि अपने जवान पुत्र की मौत के बाद उसके अंग दान करना कोई आसान काम नहीं था, परन्तु उसने मानवता के लिए यह किया क्योंकि वह चाहता था कि उसका पुत्र अन्य लागों में जि़ंदा रहे।आईईसी मीडिया सलाहकार सारयू डी मादरा ने बताया कि मिलिट्री लिटरेचर फैस्टिवल के दौरान लोगों द्वारा अंगदान के प्रति अच्छा रुझान देखने को मिला। उसने बताया कि कैंप के दौरान 70 से अधिक लोगों ने अपनी मौत के बाद शरीर के अंग दान करने के प्रण पत्रों पर हस्ताक्षर किये। इस कैंप में डाटा मैनेजमेंट सलाहकार मिलन कुमार बागला और ट्रांसप्लांट कोऑर्डीनेटर करनजोत थिंद भी उपस्थित थे।रोटो पीजीआई के नोडल अफ़सर प्रो. विपिन कौशल ने कहा कि अंगों के जरूरतमंदों और उपलब्धता में बड़ा अंतर है, क्योंकि लोगों में अंग दान के प्रति जागरूकता और ज्ञान नहीं है और वह गलतफहमियों के कारण अंग दान करने के लिए आगे नहीं आते। उन्होंने कहा कि इसलिए रोटो द्वारा इस विषय के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए हर प्रयास इस्तेमाल किया जा रहा है और इस फैस्ट के दौरान लगाए गए जागरूकता स्टॉल पर न केवल लोगों ने जानकारी लेने के लिए रुचि दिखाई, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मौत के बाद अपने अंग दान करने की लिखित इच्छा भी अभिव्यक्त की।