पंजाब

कैमल मर्चैंट ऑफ फीलाडेलफिया’ पुस्तक पर विचार-विमर्श

पुस्तक में शेर-ए -पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के दरबार और समकालीन शख्सियतों सम्बन्धी कहानियां संबंधी दी गई जानकारी
चंडीगढ़ – मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह के दरबार सम्बन्धी अनकही कहानियों पर केन्द्रित पुस्तक ‘कैमल मर्चैंट ऑफ फीलाडेलफिया’ संबंधी विचार-विमर्श के लिए एक विशेष सैशन का आयोजन किया गया।पुस्तक ‘कैमल मर्चैंट ऑफ फीलाडेलफिया’ के लेखक श्री सरबप्रीत सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में महाराजा रणजीत सिंह के सिख दरबार (कोर्ट) की कहानियों की आलोचना की गई है, जिसको 1801 ई. में पंजाब का महाराजा घोषित किया गया था और उन्होंने एक बड़े साम्राज्य पर कब्ज़ा कर लिया था जो अफगानिस्तान की हद से ब्रिटिश राज्य तक फैला हुआ था। लेखक ने उनकी सासू सदा कौर और उनकी फ़ौज के बहादुर नेता अकाली फूला सिंह जैसी शख्सियतों के साथ उनके रिश्तों संबंधी भी प्रकाश डाला।उन्होंने आगे बताया कि इस पुस्तक में महाराजा रणजीत सिंह और उनकी जैसी अन्य शख्सियतें जैसे कि राजा ध्यान सिंह, गुलाब सिंह और सुचेत सिंह की अनकही कहानियों संबंधी भी बताया गया है। पुस्तक में सिख मुखियों संधवालीया और अटारीवाला; फक़ीर भाई अज़ीज़ऊदीन, इमामऊदीन और नूरऊदीन संबंधी भी बताया गया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में एक दूसरी की अपेक्षा और ज्यादा ख़ूबसूरत रानियों की कहानियाँ भी शामिल की गई हैं और रानी जींदां संबंधी भी प्रकाश डाला गया जिन्होंने पंजाब को पतन की तरफ ले जाने वाले सिख राज के कमज़ोर होने वाले सालों के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।पुस्तक के शीर्षक संबंधी बात करते हुए श्री सरबप्रीत सिंह ने कहा कि वह मार्किटिंग और टैक्नॉलोजी के पेशे में काम करते थे इसलिए उन्होंने इस पुस्तक संबंधी उत्सुकता पैदा करने के लिए इस शीर्षक की चयन की।उन्होंने कहा कि जनरल जोसिआह हरलन – द कैमल मर्चैंट ऑफ फीलडेलफिया, जिन्होंने धार्मिक प्रचारक के तौर पर जि़ंदगी की शुरुआत की और महाराजा रणजीत सिंह के दरबार में प्रमुखता हासिल की।

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