हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट, शिमला द्वारा पंजाब की मुख्य नदियों को बचाने सम्बन्धी वर्कशॉप का आयोजन
चंडीगढ़ – पंजाब के वन मंत्री स. साधु सिंह धर्मसोत ने कहा है कि आज के समय में नदियों और पर्यावरण को बचाने के लिए वृक्ष अत्यंत ज़रूरी हो गए हं। उन्होंने यह खुलासा आज यहाँ हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट, शिमला द्वारा पंजाब की मुख्य नदियों सतलुज, रावी, ब्यास के किनारे जंगल बढ़ाकर इन नदियों को बचाने के लिए आयोजित की गई वर्कशॉप को संबोधन करते हुए किया।स. धर्मसोत ने बताया कि लोगों का जीवन में खान-पान और पहनावा तो अलग-अलग हो सकता है परन्तु पानी और पर्यावरण की सबको एक समान ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि वृक्ष अपने जीवन काल की शुरुआत से ही फल, फूल, छाया देते हुए पर्यावरण को शुद्ध करना शुरू कर देते हंै और अपने जीवन काल के अंत के बाद भी कई तरह से मनुष्य के काम आते हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारी मिट्टी को क्षरण से बचाते हैं।स. धर्मसोत ने बताया कि देश के विभाजन से पहले पंजाब पूरा हरा भरा वन था। उन्होंने कहा कि देश ने आज़ादी के बाद अनाज सम्बन्धी विदेशों पर निर्भरता को ख़त्म करके आत्मनिर्भर होने के लिए इतना ज़्यादा अनाज पैदा किया कि देश में अनाज संभालने के लिए गोदाम बनाने पड़ गए परन्तु इस प्रक्रिया में पंजाब के जंगल ख़त्म होने लग गए। उन्होंने बताया कि पंजाब को हरा भरा बनाने के लिए पिछले 2 सालों के दौरान लाखों लोगों को मुफ़्त पौधे मुहैया करवाए गए हैं।वन मंत्री ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर राज्य के हर गाँव में 550 पौधे लगाए जाने सम्बन्धी जानकारी देते हुए बताया कि इस मुहिम के अंतर्गत अब तक 9000 हज़ार गाँवों में 56 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि बाकी रहते लगभग 4000 गाँवों में 30 सितम्बर तक लगा दिए जाएंगे। उन्होंने राज्य भर में पौधे लगाने और पौधों की संभाल के लिए धार्मिक संस्थाओं को सम्मिलन और सहयोग की अपील भी की।इससे पहले प्रधान मुख्य वनपाल श्री जतिन्दर शर्मा ने हिमालयन रिर्सच इंस्टीट्यूट, शिमला द्वारा शुरू किये गए प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि पंजाब में 100 साल पहले ज़मीन, पानी और नदियाँ बचाने के लिए पंजाब भूमि रक्षा एक्ट लागू किया गया था। इस वर्कशॉप में वन विभाग पंजाब के अलावा चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश आदि के वन विभाग और दूसरे विभागों के नुमायंदों और माहिरों ने भाग लिया।