पंजाब

धान की पराली को जलाने के प्रचलन को रोकने के लिए प्रयास

15 सितम्बर तक मशीनरी किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य किया निर्धारित
चंडीगढ़ – राज्य को पराली जलाने से मुक्त करने के मकसद से पंजाब कृषि विभाग ने मौजूदा वित्त वर्ष में पहले पड़ाव अधीन किसानों को 28000 से अधिक कृषि मशीनें /यंत्र मुहैया करवाने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम शुरू कर दी है। 278 करोड़ रुपए की सब्सिडी के साथ मुहैया करवाए जा रहे ये कृषि यंत्र फ़सल के अवशेष के खेतों में ही प्रबंधन के लिए सहायक होंगे। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि किसानों को कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मुहैया करवाई जा रही है जिसके अंतर्गत सहकारी सभाओं और किसान समूहों को 80 प्रतिशत जबकि किसानों को व्यक्तिगत रूप में 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। राज्य सरकार की तरफ से किसानों को अव्वल दर्जे की कृषि मशीनरी मुहैया करवाई जायेगी जिसमें सुपर एस.एम.एस., हैपी सिडर, पैडी स्ट्रॉ चौपर /श्रैडर/मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सीबल मोल्ड बोर्ड पलौए और ज़ीरो टिल ड्रिल मशीनें शामिल हैं।कृषि विभाग के सचिव के.एस. पन्नू ने बताया कि सब्सिडी पर मशीनरी लेने के लिए किसानों और किसान समूहों और प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं से अब तक लगभग 12000 आवेदन हासिल हुए हैं। उन्होंने आगे बताया कि पहले पड़ाव अधीन व्यक्तिगत तौर पर अआवेदन देने वाले किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर 15000 मशीनें दी जा रही हैं जबकि 2200 किसानों समूहों/सहकारी सभाओं को फार्म मशीनरी बैंक बनाकर कस्टम हायरिंग सैंटर के तौर पर प्रयोग के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी पर 13000 मशीनें मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को अपेक्षित मशीनरी मुहैया करवाने के लिए कृषि विभाग 15 सितम्बर, 2019 से पहले किसानों तक मशीनरी पहुँचाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है। कृषि विभाग ने किसानों को धान की पराली जलाने के बुरे प्रभाव संबंधी अवगत करने के लिए सूचना, शिक्षा और संचार संबंधी गतिविधियां भी शुरू की हुई हैं। इस जागरूकता मुहिम का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ फ़सलीय अवशेष के खेतों में ही प्रबंधन के लिए यंत्रों का व्यावहारिक प्रदर्शन करना है।कृषि विभाग ने किसानों को सब्सिडी पर दी जा रही कृषि मशीनरी का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील की है ताकि पराली जलाने के प्रचलन को रोका जा सके जिससे लोगों के स्वास्थ्य को यकीनी बनाने के साथ-साथ राज्य के पर्यावरण को भी बचाया जा सके।बताने योग्य है कि वर्ष 2018-19 के दौरान भी धान की पराली के निपटारे के लिए सब्सिडी पर 28,609 कृषि मशीनें दी गई थीं जिनमें किसानों को व्यक्तिगत रूप से 50 प्रतिशत सब्सिडी पर 12075 मशीनें जबकि सहकारी सभाओं और किसान समूहों को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर 16534 मशीनें मुहैया करवाई गई थीं।यहाँ यह भी जि़क्रयोग्य है कि पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान की काश्त अधीन है। धान की कटाई के बाद खेतों में धान की 20 मिलियन टन पराली होने की आशा है जिसको किसानों द्वारा रबी की आगामी फ़सल से पहले निपटाया जाना है।

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