27 जुलाई 2019 को हुई जीएसटी परिषद की 36वीं बैठक में लिए गए ऐतिहासिक फैसले देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। जीएसटी परिषद ने भारत को इलेक्ट्रिक गाड़ियों का मैनुफैक्टरिंग हब बनाने की दिशा में बड़े फैसला लेते हुए जीएसटी की दरों में बड़ी कटौती का फैसला लिया है ।
जीएसटी परिषद ने स्पष्ट किया कि 1 अगस्त 2019 से
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद पर जीएसटी की दर 12 फीसदी से कम होकर 5 फीसदी होगी
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग पर जीएसटी 18 फीसदी से कम होकर 5 फीसदी होगी
परिवहन संस्थानों द्वारा इलेक्ट्रिक गाड़ियों को किराये पर लेने पर जीएसटी नहीं लगेगा
भारत में बिजली से चलने वाले गाड़ियों की कीमत करीब 6.50 लाख से शुरू होकर 25 लाख रूपए तक जाती है। टैक्स में कमी से ग्राहकों को 40 हजार से 1.75 लाख रूपए तक की बचत होगी। पेट्रोल डीजल की कार पर 28 फीसदी जीएसटी से तुलना करें तो टैक्स में बचटत 1.5 लाख रूपए से 5.75 लाख रूपए तक की बचत होगी। उम्मीदों के मुताबिक उद्योग जगत ने इन फैसलों का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहाकसिक करार दिया। सीआईआई के महानिदेशक चन्द्रजीत बनर्जी ने कहा ” ई वेहिकल्स पर जीएसटी घटाने से ऑटोमोबाइल सेक्टर में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और इससे ग्राहकों को भी बहुत फायदा होगा ”। ऑटोमोबाइल सेक्टर के एसोसिएशन SIAM ने भी फैसले का स्वागत किया है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने एक दूसरे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए गेमप्लान तैयार कर लिया है। कांत के मुताबिक सरकार आने वाले दिनो में इलेक्ट्रिक दुपहिया, तिपहिया और सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले बड़े वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता से काम करेगी। उन्होंने ये भी संकेत दिए कि गुजरात में खारे मिट्टी की जगह वाली धोलेरा जिसे राज्य सरकार स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की कोशिश मेें है, वहां पर टाटा केमिकल्स लिथियम आयन बैटरी का मैनुफैक्चरिंग प्लान्ट लगाने के लिए बातचीत अंतिम दौर में है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बैटरी की कीमत गाड़ी की कुल कीमत का 40 फीसदी के आसपास होती है और भारत में ये ज्यादातर आयात ही की जाती है। बैटरी की कीमत घटना और देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चार्ज करने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास इस सेक्टर के लिए विकास के लिए सबसे अहम कड़ी है । साल 2019-20 के आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट सिफारिश की गई है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए सब्सिडी की बजाय बुनियादी ढांचे ( चार्जिंग स्टेशन्स) का विकास सबसे अहम है। ऐसा असलिए क्योंकि एक बार चार्ज करने के बाद आप गाड़़ी को सीमित दूरी तक ही चला सकते हैं। एक दूसकी मुश्किल ये भी है कि इन गाड़ियों को चार्ज करने में काफी समय लगता है। फास्ट चार्जिग स्टेशन्स पर भी एक गाड़ी को आधे घंटे का वक्त लगता है जबकि आम चार्जर पर 8 घंटे तक का समय लग जाता है। आंकड़ो के ज़रिए, आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि जिन देशों में चार्जिंग स्टेशन्स का विकास ज्यादा हुआ वहां पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का विकास ज्यादा हुआ। FAME यानी FASTER ADOPTION AND MANUFACTURING OF ELECTRIC VEHICLES योजना के दूसरे चरण में अब 10,000 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है जिसे बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाएगा। भारी उद्योग मंत्रालय ने देश में 10,000 चार्जिंग स्टेशन्स लगाने के लिए निजी क्षेत्र, पीेसयू और स्थानीय निकायों के निविदा आमंत्रित की है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने हाल ही में ऐलान किया है कि दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे पर 10 किलोमीटर को इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने का पायलट शुरु किया जाएगा। लेकिन इसमें 2 से 3 साल का वक्त लग सकता है । योजना पर 200 करोड़ खर्च होंगे और इस एक्सप्रेस वे पर ट्रक 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे।