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असम, बिहार में बाढ़ की स्थिति में सुधार

असम और बिहार में नदियों का जलस्तर घटने से बाढ़ से लोगों को राहत मिलती दिखाई पड़ रही है, हालातों को देखते हुए राहत और बचाव का कार्य अब भी जोरों पर है। परिस्थितियों के मद्देनज़र केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की अगुवाई में असम के सांसदों ने प्रधानमंत्री से की मुलाकात। तो वहीं पीएम मोदी ने भी हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।मूसलाधार बारिश और बाढ़ से बिहार और असम समेत कई राज्यों में स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। हालांकि नदियों के जलस्तर में कुछ सुधार हो रहा है, लेकिन अभी भी लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। बिहार में 12 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। सीतामढ़ी में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। बाढ़ के बाद बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन मुल्तौदी से काम कर रहा है। मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। राज्य में 1 लाख से ज्यादा लोग इस समय राहत शिविरों में रह रहे है और कई अन्य लोगों ने बाढ़ के पानी से बचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर शरण ली है। राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और एस.एस.बी की 26 टीमों को राहत अभियान के काम में लगाया गया है।असम में बाढ़ में 11 और लोगों की मौत के साथ मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 47 हो गई है जबकि राज्य के 33 में से 27 जिलों में करीब 49 लाख लोग प्रभावित हैं। राज्य में करीब पौने दो लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पबित्रो वन्यजीव अभयारण्य का करीब 90 फीसदी हिस्सा पानी में डूबा है। राहत की बात यह है कि राज्‍य की अधिकांश नदियों का जल स्‍तर कम हो रहा है। हालांकि ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। इससे राज्‍य के बाढ़ प्रभावित ज्‍यादातर जिलों के हालात में थोड़ा सुधार हुआ है। पानी में घिरे लोगों को बाहर सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है।इस बीच केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की अगुवाई में असम के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान राज्य में मौजूदा बाढ़ की स्थिति और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा हुई। पीएम ने सदस्यों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में लगातार बाढ़ का क़हर जारी है। असम और बिहार में नदियों के जलस्तर में कमी के बावजूद समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है दोनों राज्यों में प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए कमर कस ली है। बिहार में बाढ़ के हालात काफी खराब हैं। बाढ़ की मुख्य वजह नेपाल में लगातार जारी भारी बारिश है। हांलाकि कुछ जगहों पर बारिश थमने से हालात बेहतर होते दिख रहे है। इस बीच बिहार में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या 78 हो चुकी है। बाढ़ के कारण सीतामढ़ी जिले में सबसे अधिक 18 मौतें हुईं हैं तो मधुबनी में 14, अररिया ज़िले में अब तक 12 मौत की ख़बर है। राज्य में बाढ़ से 55 लाख से अधिक लोग प्रभावित है। राज्य के 12 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। सीतामढ़ी में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है। प्रशासन ने ब्लीचिंग पाउडर का छिडकाव और दूसरे अन्य एतिहातन उपाय उठाने के लिए कमर कम ली है। राज्य में मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। राज्य में 1 लाख 13 हजार लोग इस समय राहत शिविरों में रह रहे है और कई अन्य लोगों ने बाढ़ के पानी से बचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर शरण ली है। राष्‍ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और एस.एस.बी की 26 टीमों को राहत अभियान के काम में लगाया गया है। हालाँकि मुश्किल हालात के चलते मोतिहारी के बाढ़ प्रभवित इलाको में बाढ़ पीड़ितों का आक्रोश अब दिखने लगा है और विभिन्न प्रखंड कार्यालयों में आक्रोशित बाढ़ पीड़ित लगातार हंगामा कर रहे हैं।इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ से निपटने के मकसद से राज्य के बड़े अधिकारियों के साथ एक बैठक की। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों को 6000 क अनुग्रह राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा करा दी है। बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने बाढ़ से प्रभावित मधुबनी ज़िले का दौरा किया और कहा कि प्रशासन की तरफ से लोगों को हरसंभव सहायता दी जा रही है और जो भी कमियाँ रह रही हैं उनको भी दुरुस्त किया जा रहै है।उधर पूर्वोत्तर राज्य असम के 28 जिले बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित हैं और वहाँ पर भी कम से कम 57 लाख लोग बेघर हो चुके हैं। राहत की बात यह है कि राज्‍य की अधिकांश नदियों का जल स्‍तर कम हो रहा है। हालांकि ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है। इससे राज्‍य के बाढ़ प्रभावित ज्‍यादातर जिलों के हालात में थोड़ा सुधार हुआ है। असम का बारपेटा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है जहां पर करीब साढ़े तेरह लाख लोग प्रभावित हैं। राज्य में अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4 हजार घरों को नुकसान हुआ है और 25 लाख मवेशी भी प्रभावित हैं। राज्य में 2 लाख 12 हज़ार हेक्टेयर फसल का नुकसान हो चुका है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में हालाँकि पानी का स्तर कम हो रहा है लेकिन अभी भी 98 कैंप पानी में डूबे हुए हैं। अभी तक 87 जानवरों की मौत हो चुकी है। भुरगांव में भी हालात काफी खराब हैं । सडकें पानी में डूब गयी हैं । वहां सेना को राहत कार्य में लगाया गया है और उसने काफी लोगों को बाहर निकाला है ।

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