पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा मेघालय में तुरंत प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला

उत्तरी -पूर्वी राज्यों में बसते पंजाबियों को धमकियों की रिपोर्टों के मद्देनजऱ उठाया कदम
चंडीगढ़ – मेघालय के मुख्यमंत्री कोनारड संगमा को उत्तरी -पूर्वी राज्यों में बसे पंजाबियों को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए ज़रुरी कदम उठाने की अपील करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य से चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तुरंत वहां भेजने का फ़ैसला किया है जिससे पीडि़त लोगों से सम्बन्धित मसलों का हल निकाला जा सके।एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जल स्रोत मंत्री सुखबिन्दर सिंह सरकारिया करेंगे जो मेघालय के मुख्यमंत्री और अन्य सम्बन्धित लोगों को मिलेंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में संसद मैंबर रवनीत सिंह बिट्टू और जसबीर सिंह गिल के अलावा विधायक कुलदीप सिंह वैद्य शामिल होंगे। योजनाबंदी के विशेष सचिव डी.एस. मांगट को भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने के आदेश दिए गए हैं जिनको मुख्य सचिव ने तालमेल करने के लिए कहा है।वहां बसते पंजाबियों को कुछ स्थानीय प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से मिली धमकियों संबंधी सामने आईं मीडिया रिपोर्टों के मद्देनजऱ मुख्यमंत्री ने यह निर्देश जारी किये हैं। आतंकवादी संगठनों ने इन लोगों को वहां से निकालने के लिए राज्य सरकार की कोशिशों में रुकावट डालने की सूरत में नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है।श्री संगमा को लिखे पत्र में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह रिपोर्टें स्वाभाविक तौर पर पंजाब में चिंता पैदा करती हैं क्योंकि यह परिवार देश की आज़ादी से भी पहले लंबे समय से शिलोंग में रह रहे हैं। उन्होंने अपने समकक्ष को वहां रह रहे पंजाबियों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए तुरन्त कदम उठाने की अपील की।इस मसले की संवेदनशीलता का जि़क्र करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री ने सभी भाईवाल पक्षों की तसल्ली के मुताबिक इस मसले को ध्यान से और सुखद ढंग से हल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यह ज़रूरी है कि इस मसले को धार्मिक या संकुचित रंगत लेने की इजाज़त न दी जाये।अपने पत्र में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पिछले साल पंजाब के सहकारिता मंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल के मेघालय दौरे का भी जि़क्र किया जहां प्रतिनिधिमंडल ने इसी मसले पर वहाँ के मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने वहां बसते पंजाबियों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों के साथ भी मुलाकात की थी और सभी सम्बन्धित पक्षों ने भरोसा दिलाया था कि इन लोगों को यहां से निकाला नहीं जायेगा।

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