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जेट एयरवेज का परिचालन बंद होने से गहराया संकट

जेट एयरवेज का परिचालन ठप होने के बाद कर्मचारियों की मैनेजमेंट से वार्ता, केंद्र सरकार से भी मांगी मदद, एयर इंडिया ने जेट के पांच खड़े किये गये विमानों को पट्टे पर लेने की इच्छा जताई तो डीजीसीए ने जेट एयरवेज से विश्वसनीय पुनरोद्धार योजना मांगी.भारत की सबसे बडी निजी एयरलाईन कंपनी रह चुकी जेट एयरवेज की उडानें आज से थम गईं। अमृतसर से मुंबई के बीच बुधवार की रात आखिरी उड़ान भरने के साथ ही जेट एयरवेज का हवाई सफर फिलहाल थम गया है ।  एक समय देश की सबसे बड़ी प्राइवेट एयरलाइन रही जेट एयरवेज ने भारी वित्तीय संकट से जूझने के बाद हवाई जहाज़ उड़ाने से हाथ खड़े कर दिये हैं।हालांकि संकट को सुलझाने के लिये लगातार बैठकों का दौर भी चल रहा है ।  जेट के कर्मचारी संगठनों ने वर्तमान संकट को सुलझाने के लिये प्रबंधन से बातचीत की । कर्मचारी यूनियन ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता कर केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में मदद मांगी है। पिछले एक दशक में किंगफिशर के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट दूसरी कंपनी बन गई है। विजय माल्या की किंगफिशर ने साल 2012 में कामकाज बंद किया था। जेट की उड़ानें रुक जाने के बाद अब कंपनी के करीब 22000 कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गये हैं। जेट की फ्लाईट बंद होने से मुम्बई हवाई अड्डे में कई मुसाफिर अपने टिकट के पैसे वापस मांगने के लिये जेट काउंटर पर दिखाई दिये। वहीं गुरुवार को जेट एयरवेज का परिचालन बंद होने का असर बैंकों और अन्य ऋणदाताओं के शेयरों पर भी दिखा।गौरतलब है कि जेट को कर्ज देने वाले बैंकों के समूह की ओर से एसबीआई कैप ने 8 अप्रैल को जेट एयरवेज की 32.1 से 75 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री के लिए 8 से 12 अप्रैल तक बोलियां आमंत्रित की थी। इनमें एतिहाद एयरवेज, नैशनल इन्वेस्टमेंट फंड, निजी क्षेत्र के टीपीजी और एक अन्य कोष इंडिगो पार्टनर की पात्र बोलीदाता के तौर पर पहचान की गई। इनके पास अंतिम वित्तीय बोली सौंपने के लिए 10 मई तक का समय है।

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