मस्कुलर डिस्ट्रोफी ये एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और एक सीमा के बाद बेकार हो जाती हैं. उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह बीमारी पूरे शरीर में फैलती जाती है.मस्कुलर डिस्ट्रोफी एक ऐसी बीमारी है जो भारत में कुछ लोगों में पाई जाती है, खासकर बच्चे इस बीमारी से काफी परेशान होते हैं, इस बीमारी में हाथ-पैर काम करना बंद कर देते हैं, शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और एक सीमा के बाद बेकार हो जाती हैं.ये बीमारी आनुवांशिक भी हो सकती है और जीन्स से जुड़ी भी होती है. दिल्ली में श्री हरि सेवा ट्रस्ट और इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्कुलर डिस्ट्रोफी के तत्वाधान में चल रहे एक कैंप में एम्स अस्पताल की न्यूरोलॉजी विभाग की डॉक्टर निशिता ने बीमारी से प्रभावित लोगों को इसके बारे में जानकारी दी.आईएएमडी की अध्यक्ष संजना गोयल, जो खुद इस बीमारी से पीड़ित हैं, उन्होंने बताया कि उनका पहला मकसद बीमारी पर जागरूकता लाना है. आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर पीड़ितों के स्वास्थ्य लाभ की कामना की.मस्कुलर डिस्ट्रोफी का कोई संतोषजनक उपचार अभी तक नहीं मिल पाया है. वैज्ञानिक इस बीमारी के लिए जिम्मेदार डिफेक्टिव जीन्स की पड़ताल में लगे हैं. बीमारी के शुरुआती चरण में फिजियोथेरेपी काफी मददगार साबित हो रही है.