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ब्रेक्जिट मुद्दे पर ब्रिटिश संसद में अहम मतदान

ब्रेक्जिट मुद्दे पर रास्ता साफ करने के लिए ब्रिटिश संसद में कई प्रस्तावों पर होगा मतदान. प्रधानमंत्री थेरसा मे ने कहा- वे सांसदो के निर्णय से नही है बंधी.

ब्रेक्जिट मुद्दे पर रास्ता साफ करने के लिए ब्रिटिश संसद आज कई प्रस्तावों पर निर्दशात्मक मतदान करेगा। सांसदों के पास अब विभिन्न विकल्पों पर मतदान करने का मौका होगा जैसे कि बिना समझौते का ब्रेक्सिट, . यूरोप ब्रिटेन के बीच कस्टम यूनियन बनाने का प्रस्ताव,  नए समझौते के साथ ब्रेक्सिट या ब्रेक्सिट पर नया जनमत संग्रह, या बिना समझौते के ही यूरोपीय संघ से अलग हो जाना। हालांकि अगर सांसदों को बहुमत मिल भी जाता है तो भी सरकार उनके निर्देशों का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है.

कई विकल्पों पर मतदान करने का मौका
1.बिना समझौते का ब्रेक्सिट  
2. यूरोप ब्रिटेन के बीच कस्टम यूनियन बनाने का प्रस्ताव
3. नए समझौते के साथ ब्रेक्सिट या ब्रेक्सिट पर नया जनमत संग्रह   
4. या बिना समझौते के ही यूरोपीय संघ से अलग हो जाना।

इस बीच प्रधानमंत्री थेरसा मे ने कहा है कि वे सांसदो के निर्णय से बंधी नही है। इससे पहले ब्रिटेन की सांसदों ने ब्रेक्जिट प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाने के लिए सोमवार को मतदान किया जिससे उन्हें ब्रेक्जिट के विभिन्न विकल्पों के लिए अपनी प्राथमिकता जाहिर करने का अधिकार मिल गया। ब्रिटेन के विदेश मंत्री, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री और व्‍यापार मंत्री ने संशोधन का समर्थन करते हुए सरकार से इस्‍तीफा दे दिया है। अगर  वैकल्पिक मतदान में सांसद यदि किसी डील पर सहमत हो जाते है तो ब्रिटेन के पास यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए 22 मई तक समय होगा लेकिन यदि किसी डील पर सहमति नहीं बन पाती है तो ब्रिटेन के पास 12 अप्रैल तक का समय होगा।

जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होगा तब तुरंत ही ब्रिटेन में यूरोपीय संघ के कानून ब्रिटेन के कानून की जगह ले लेंगे। यह कोई क्षणिक और तत्काल बदलाव नहीं हो सकता। इसमें कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। ब्रिटेन के जिन नेताओं पर जिम्मेदारी थी कि वे ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, उन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री थेरेसा मे के नेतृत्व में एक मसौदा तैयार किया और उसको लेकर यूरोपीय संघ से बातचीत की और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया।

प्रक्रिया के इस प्रस्ताव के अंतिम रूप, जिसे यूरोपीय संघ की सहमति मिली जब अनुमोदन के लिए ब्रिटेन की संसद में रखा गया, संसद ने इसे खारिज कर दिया वह भी दो बार। अब ऐसे में लगने लगा है कि ब्रिटेन को बिना किसी डील के यूरोपीय संघ से अलग होना पड़ सकता है जो ब्रिटेन और यूरोप दोनों को आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित होगा। इस स्थिति को टालने से यूरोपीय संघ और ब्रिटेन दोनों को नुकसान होगा।

झगड़ा इसी बात पर है कि अलग कैसे होना है और इसका तरीका क्या हो। ब्रिटेन के ज्यादातर सांसदों को प्रधानमंत्री का तरीका पसंद नहीं है। बहुत मुश्किल है कि (ब्रिटेन सांसदों के लिए) अब कोई सर्वमान्य तरीका निकल आए। इससे भी बड़ी बात नए मसौदे को यूरोपीय संघ से सहमति दिलवानी होगी जिसके लिए समय नहीं बचा है। इसीलिए 12 मार्च के मतदान के समय प्रधानमंत्री मे ने कहा था कि देश के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। मसौदे में सबसे विवादास्पद मुद्दा बैकस्टॉप नीति का है।

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