पंजाब

गतका और सिक्ख शस्त्र कला को निजी स्वामित्व के तौर पर रजिस्टर्ड करवाना सरासर गलत :ढींढसा

श्री अकाल तख्त साहिब को इस धार्मिक मुद्दे पर दख़ल देने के लिए कहा
चंडीगढ़ – राज्यसभा सदस्य, अकाली नेता  व विश्व गतका फेडरेशन (रजि़.) के चेयरमैन स. सुखदेव सिंह ढींडसा दिल्ली की एक कंपनी द्वारा सिक्ख शस्त्र कला और गत्के के नाम को ट्रेड मार्क कानून के अंतर्गत रजिस्टर्ड (पेटैंट) करवाने की कठोर निंदा की है। उन्होंने कहा कि गतका और शस्त्र विद्या गुरू साहिबान द्वारा सिक्खों को बख्शी हुई बहुमूल्य रहमत है और पुरातन सिक्ख इतिहास और विरासत के साथ जुड़ी हुई समुची कौम की गौरवमयी और पुरातन खेल है जिसका मालिक कोई भी नहीं बन सकता और न ही कोई इसको रजिस्टर्ड या पेटैंट करवा सकता है। आज यहां एक बयान में विश्व गतका फेडरेशन के चेयरमैन स. सुखदेव सिंह ढींडसा ने हैरानी प्रकट करते हुये कहा कि कंपनी कानून के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक निजी फर्म द्वारा गतका और सिक्ख शस्त्र कला के नामों को ट्रेड मार्क कानून के अंतर्गत पेटैंट करवाना समझ से परे है क्योंकि सिक्खी और सिक्ख इतिहास के साथ भद्दा मज़ाक है। ऐसे व्यक्ति का यह कदम सिक्ख धरोहर पर कब्ज़ा करने के बराबर है जोकि मन्दभागी बात है और कोई भी सिक्ख इसको सहन नहीं कर सकता।स. ढींडसा कहा कि सिक्ख शस्त्र कला का गुरू इतिहास, गुरूबानी और सिक्ख सभ्याचार के साथ सम्बन्ध होने के कारण श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को भी इस धार्मिक मुद्दे पर दख़ल देकर इन दोनों ट्रेड मार्कों के स्वामित्व को तुरंत रद्द करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ऐसी व्यवस्था कायम की जाये कि भविष्य में भी कोई व्यक्ति सिक्ख धरोहर पर ऐसा कब्ज़ा करने या उसे बेचने या उसके द्वारा पैसा कमाने की छूट किसी को भी न दी जाये।इसी दौरान स. सुखदेव सिंह ढींडसा ने यह भी कहा कि दिल्ली में मार्च महीने इसी निजी फर्म द्वारा करवाई जा रही ‘वल्र्ड गतका लीग’ के साथ विश्व गतका फेडरेशन का कोई सम्बन्ध नहीं और न ही इस गतका लीग को विश्व गतका फेडरेशन द्वारा कोई मान्यता दी जायेगी।उन्होंने कहा कि स्थापित खेल कानूनों और नियमों के अनुसार किसी भी स्तर का राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामैंट सिफऱ् उस खेल की संबंधित विश्व खेल फेडरेशन या राष्ट्रीय खेल फेडरेशन की निगरानी और नेतृत्व अधीन ही करवाया जा सकता है और केंद्र सरकार द्वारा लागू किये गये नेशनल स्पोर्टस कोड और भारतीय ओलम्पिक चार्टर भी इस संबंधी स्पष्ट है।

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