14 फरवरी को पुलवामा के आतंकवादी हमले में 40 जवानों को खोने के बाद
सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने श्रीनगर में साझा प्रेस
कॉन्फ्रेंस की. सेना ने कहा कि पुलवामा हमले की साजिश पाकिस्तान ही रची गई
और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की मदद से ही जैश-ए-मोहम्मद ने हमला
किया. सेना की ओर से कश्मीर की माताओं से एक महत्वपूर्ण अपील भी की गई कि
वो अपने भटके हुए बेटों को समर्पण के लिए कहें.
पुलवामा आतंकवादी
हमले के बाद श्रीनगर की जमीन से सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों और उनके
सरपरस्तों के लिए साफ-साफ ये एलान कर दिया कि उनके साथ अब सिर्फ गोलियों से
ही बात होगी. सरकार से मिली खुली छूट के बाद सेना ने उस क्रूर हमले के 100
घंटे के भीतर ही आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया. सेना की ओर से कहा गया
है कि जैश-ए-मोहम्मद को पाकिस्तान की आईएसआई कमांड देती है और ये आतंकी
संगठन पाकिस्तानी सेना का ही बच्चा है.
18 फरवरी को पुलवामा में
सेना की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के मारे गए आतंकवादी के बाद सेना का
कहना है कि कश्मीर घाटी में जैश का नेतृत्व खत्म हो गया है. उस ऑपरेशन में
आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का साथी कामरान आतंकवादी मारा गया, जो घाटी
में नौजवानों को भड़काने और ट्रेनिंग देने का काम कर रहा था. ढेर हुआ दूसरा
आतंकवादी हिलाल बम बनाता था और तीसरा राशिद उर्फ गाज़ी पाकिस्तानी था.
तीनों मिलकर घाटी में कुछ और हमले की योजना बना रहे थे.
सेना की ओर
से कश्मीर की सभी माताओं से अपील की गई है कि बंदूक उठाने से पहले वो अपने
भटके हुए बेटों से समर्पण करा लें, इसके लिए सरकार की नीति भी है.
सीआरपीएफ
के डीजी ने शहीद जवानों के परिवार से कहा कि वो खुद को अकेला न समझें. साथ
ही देश के तमाम हिस्सों में पढ़ने वाले कश्मीरी बच्चों के लिए सीआरपीएफ की
हेल्पलाइन का जिक्र किया और कहा कि ये उनके लिए हर तरह से मददगार साबित
होगा.
जम्मू-कश्मीर पुलिस घाटी में मुस्तैद है. पुलवामा हमले के बाद
सुरक्षाबलों ने पुख्ता सूचना पर जिस तरह जैश के नेतृत्व का खात्मा किया
है, उससे जवानों के हौसले बुलंद हैं.
पुलवामा हमले का घाव अभी हरा
है, उसका दर्द देश का हर शख्स महसूस कर रहा है. सीआरपीएफ पहले ही संकल्प ले
चुका है कि वो पुलवामा का दर्द न भूलेगा, न कभी माफ करेगा और खून की हर
बूंद का बदला लेकर रहेगा.