जीवन शैली

बच्‍चा गुस्‍से में हो तो डांटने के बजाएं करें प्‍यार से बातें, आदत में आएगा सुधार

बच्चा जिस तरह क्रोध से निपटता है वह विनाशकारी हो सकता है

बच्‍चे को गुस्‍से से डांटने के बजाए उसे गुस्‍से से बाहर निकालना जरूरी है। बच्‍चों पर काबू पाने के लिए आपको धैर्य और समझ दोनों की आवश्यकता होती है। चाहे वह स्नैक न पाने की वजह से हो या किसी खिलौने के ऊपर खेलने वाले के साथ लड़ना, छोटे बच्चों को कई बार गुस्सा आ जाता है। क्रोध स्वयं में अच्छा या बुरा नहीं होता है। बच्चा जिस तरह क्रोध से निपटता है वह रचनात्मक या विनाशकारी हो सकता है। एक अभिभावक के रूप में बच्‍चे को गुस्‍से से डांटने के बजाए उसे गुस्‍से से बाहर निकालना आपके लिए जरूरी है। ऐसे समय में बच्‍चों पर काबू पाने के लिए आपको धैर्य और समझ दोनों की आवश्यकता होती है।
अगर आपका बच्चा भी इन दिनों ज्यादा गुस्सा करने लगा है, तो सबसे पहले अपने बच्‍चे के साथ प्‍यार से बातें करें और उससे इस तरह परेशान रहने का कारण जानें। उसके परेशान और गुस्सा करने की वजह जानने के बाद उस समस्या को दूर करने का प्रयास करें।

आधुनिक जीवनशैली का असर बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। आज खेल के मैदान की जगह प्ले स्टेशन ने ले ली है। शिक्षा से लेकर खेलकूद तक हर क्षेत्र में बच्‍चों में प्रतियोगिताओं में आगे निकलने का दबाव पड़ रहा है। जिससे बच्‍चों में गुस्‍सा बढ़ रहा है।

शहरों के एकल परिवारों में माता-पिता दोनों के वर्किंग होने पर बच्चा अकेलेपन से जूझता हैं। यह भी बच्चों में चिड़चिड़ापन और जल्दी गुस्सा होने की वजह है। आजकल के बच्चे स्कूल, ट्यूशन और न जाने क्‍या-क्या एक साथ ‘अटेंड’ करते हैं। नींद कम लेते हैं, और खाने का भी कोई सही समय नहीं रहता। इससे ‘शुगर’ कम हो जाती है जिससे गुस्सा आता है। उन्हें पढ़ाई अच्छी नहीं लगती। उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। अपनी बात को प्रकट करने के लिए गुस्‍सा करने लगते हैं। कई बार ध्यान खींचने के लिए भी बच्चे ऐसा करते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी अनदेखी हो रही है, इसलिए माता-पिता समेत लोगों का ध्यान खींचने के लिए वह इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं।

बच्चों को इग्नोर न करें, वह जो भी कहें उनकी हर बात सुनें ताकि वे आपसे हर बात शेयर कर सकें और जिद न करें। धैर्य रखें अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा नखरें करता है और आपकी बात नहीं मानता है तो धैर्य रखें। ऐसे जिद्दी बच्चों को प्यार से ट्रीट करें। उन्हें हर बार नॉर्मल रहकर समझाएं। धैर्य रखने से आपके लिए बच्चे को संभालने में आसानी होगी।
    दिन भर की थकान के बाद आप खुद मानसिक रूप से इतने थक जाते हैं कि छोटी—छोटी बातों पर भी बच्चों पर भड़क जाते हैं। लेकिन आपको यह बात याद रखनी चाहिए कि बच्चे जो देखते हैं, वही सीखते हैं। ऐसे में आपका उनके प्रति अग्रेसिव व्यवहार उनके दिमाग पर असर डालता हैं। बदले में वो भी फिर आपके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं।

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