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त्रिपुरा से केरल तक कोविड-19 के ख़िलाफ़ वैक्सीन की खेप पहुंचनी जारी

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16 जनवरी से देश में कोरोना टीकाकरण की शुरूआत होने वाली है ऐसे में पूरे देश में कोरोना वैक्सीन पहुंचाने का सिलसिला जारी है… तमाम शहरों तक लाखो डोज़ पहुंच चुकी है जिसको कोल्ड स्टोर में सुरक्षित रखा गया है। पहले चरण में देश के 3 करोड़ मेडिकल प्रोफेश्नल्स और फ्रंट लाईन वर्कस को लगेगा तो वही टीकाकरण के लिये ट्रेनिंग प्रोग्राम भी पूरा कर लिया गया है।ये आगाज है कोविड-19 के ख़िलाफ़ निर्णायक जंग की। 16 जनवरी को बजेगा बिगुल और शुभारंभ होगा देशव्यापी टीकाकरण का। देश के 130 करोड़ से ज़्यादा की आबादी तक टीका पहुंचाना का ये महाभियान दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा टीकाकरण का अभियान होगा। देश में इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अब बारी है देश के सभी राज्यों तक टीके की आपूर्ति का। इसी कड़ी में बुधवार को केरल, गोवा, म.प्र., दिल्ली, झारखंड में देश में निर्मित टीके की खेप पहुंची।वहीं त्रिपुरा के अगरतला में भी वैक्सीन की खेप पहुंची वहां 8 ज़िलों के 15 सेंटर पर भेजी जाएगी। उ.प्र. के वाराणसी में पूर्वांचल के 14 ज़िलों के लिए 85 हज़ार डोज वाली पहली खेप पहुंच गई, वहीं छत्तीसगढ रायपुर में भी 27 पेटी टीका भंडारण गृह तक सफ़लतापूर्वक पहुंचा दी गई।स्वदेशी टीका को-वैक्सीन की 16 लाख 50 हज़ार खुराक की पहली खेप हैदराबाद से देश के 11 शहरों में सफलता पूर्वक पहुंच गई। केंद्र ने भारत बायोटेक से कुल 55लाख खुराक की मांग की है। कंपनी के एक वॉयल में 20 खुराक है जबकि सीरम की कोविशील़्ड के एक वॉयल में 10। दोनों नही वैक्सीन पहले दौर में देश के स्वास्थ्य कर्मियों को निशुल्क मुहैया कराई जा रही हैं। शनिवार से भारत दुनिया के उन 50 देशों में शामिल हो जाएगा जहां टीकाकरण शुरू हो चुका है। देश में टीकाकरण से पहले तीन चरण का पूर्वाभ्यास किया गया। इस दौरान तकनीक आधारित निगरानी और डेटा में स्पष्टता के लिए को-विन जैसे प्लेटफॉर्म को परखा गया।साल 1918 के स्पेनिश फ्लू के बाद दुनिया के सामने कोविड-19 महामारी का दंश सबसे बड़ा है। लेकिन इस सदी के दौरान देश ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मज़बूत की है। आज भारत इस महामारी के ख़िलाफ़ एक अग्रणी भूमिका के साथ दुनिया के सामने है। भारत में जहां एक ओर 2 वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है और टीकाकरण का आगाज होने जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर 4 अन्य वैक्सीन भी निर्माण की अंतिम प्रक्रिया में हैं। यानि सदी की सबसे भयावह महामारी की रोकथाम में भारत दुनिया के ज़रूरतमंद देशों तक कम लागत के साथ सुरक्षित टीका पहुंचाने के लिए पूरी तरह से तत्पर है और मानवता की सेवा के अपने हज़ारों साल पुराने संकल्प के लिए प्रतिबद्ध भी।

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