पंजाब

पेडा ने इमारतों में ऊर्जा की बचत सम्बन्धी वर्कशॉप करवाई

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चंडीगढ़ – पंजाब एनर्जी डिवैल्पमैंट एजेंसी (पेडा) ने मंगलवार को पेडा सोलर पैसिव कॉम्पलैक्स, चंडीगढ़ में इमारतों में ऊर्जा की बचत सम्बन्धी एक वर्कशॉप का आयोजन किया।पेडा, पंजाब में एनर्जी कनज़रवेशन एक्ट, 2001 लागू करने वाली राज्य की नामित एजेंसी है, जिसने ऊर्जा बचाने वाली इमारती सामग्री संबंधी एक प्रदर्शनी भी लगाई।ब्यूरो ऑफ एनर्जी ऐफीशैंसी, बिजली मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत इस साल का यह 15वां प्रोग्राम था।पेडा के चेयरमैन सरदार एच.एस. हंसपाल ने वर्कशॉप और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जिसमें ऊर्जा बचाने वाली इमारती सामग्री जैसे कि इनसूलेशन, एएसी ब्लॉक्स, एचवीएसी, ग्लास, लाईटिंग, सोलर पीवी और गर्म पानी, इलैक्ट्रिकल सिस्टम और ऑटोमेशन को अलग-अलग उत्पादकों और विक्रेताओं द्वारा प्रदशर्त किया गया।उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और ऊर्जा सरंक्षण सामग्री के प्रयोग से काफ़ी बिजली की बचत की जा सकती है जिससे ग्रीन हाऊस गैस का उत्सर्जन घटेगा जिसके स्वरूप वातावरण सुरक्षित रहेगा।वर्कशॉप में हिस्सा लेने वालों का स्वागत करते हुए पेडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री नवजोत पाल सिंह रंधावा, आई.ए.एस. ने 40 प्रतिशत तक बिजली की बचत के लिए एनर्जी कनजऱवेशन बिल्डिंग कोड के प्रयोग पर ज़ोर दिया।इस मौके पर सीनियर वाइस चेयरमैन श्री अनिल मंगला, वाइस चेयरमैन श्री करन वडि़ंग, बी.ओ.जी के मैंबर श्री सुशील मल्होत्रा और बीओजी, पेडा के मैंबर श्रीमती राज कुमारी भी मौजूद थे।पहले तकनीकी सैशन की अध्यक्षता लोक निर्माण विभाग पंजाब (बी एंड आर) के चीफ़ इंजीनियर (हैड क्वार्टर) श्री एस.के. गुप्ता और आर्कीटैक्ट सुरिन्दर बाहगा ने की, जिसमें बी.ई.ई., जी.आई.ज़ैड. और पेडा के माहिरों द्वारा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों, टिकाऊ निर्माण कला और नैट ज़ीरो एनर्जी बिल्डिंग की व्यवहारिकता के लिए ईसीबीसी के प्रयोग संबंधी पेशकारियां दी गई। अस्पताल की इमारतों में ऊर्जा की बचत सम्बन्धी दूसरा तकनीकी सैशन आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता सुपरइन्नटैंडिंग अस्पताल इंजीनियर, पीजीआई, चंडीगढ़ श्री पी.एस. सैनी और श्री रूप चंद, एस.ई., लोक निर्माण विभाग (बी एंड आर) इलैक्ट्रिकल, पंजाब ने की।माहिरों ने स्वास्थ्य संस्थाओं और अस्पतालों में ऊर्जा की बचत सम्बन्धी पेशकारियां दीं। इस वर्कशॉप में 200 से अधिक आर्कीटैक्टों, इंजीनियरों, बिल्डरों, अलग-अलग हिस्सेदार विभागों/संस्थाओं के सरकारी अधिकारियों और उद्योगों के नुमायंदों ने हिस्सा लिया।

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