पंजाब

बजट सैशन के एक दिन पंजाबी मातृभाषा को समर्पित चर्चाएं होंगी: चन्नी

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दिल के जज़्बातों और अंदरूनी भावना को प्रकट करने के लिए मातृभाषा के बिना अन्य कोई और भाषा नहीं: पातर

चंडीगढ़ – अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा पंजाब कला परिषद के नेतृत्व में मनाए गए सप्ताह की समाप्ति के अवसर पर आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर परिषद की तरफ से पंजाब कला भवन में एक शानदार साहित्यिक समागम करवाया गया।इस समागम के मुख्य मेहमान पंजाब के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने पंजाबी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता और सभ्याचार के साथ जुड़ी पंजाबियों का झंडा बुलंद करन वाली 11 शख़्िसयतों को सम्मानित किया। स. चन्नी और पंजाब कला परिषद के चेयरमैन डा. सुरजीत पातर ने जंग बहादर गोयल, सतनाम माणक, एस.एन.सेवक, गुलज़ार संधू, विद्वान सिंह सोनी, डॉ. धनवंत कौर, प्यारा लाल गर्ग, अरमजीत गरेवाल, नूर मुहम्मद नूर, पुशपिन्दर जय रूप, जतिन्दर पन्नू को सम्मान पत्र, फूलकारी और नकद राशि से सम्मानित किया।इस मौके पर संबोधन करते हुए सांस्कृतिक मामलों के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने विद्वानों और लेखकों को संबोधन करते हुए कहा कि मातृभाषा पंजाबी की शोभा और महानता आज देश-विदेश में हो रही है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने मातृभाषा को समर्पित सप्ताह मनाकर और गौरवमयी हस्तियों को सम्मानित करके अपना अहम फज़ऱ् निभाया है और पंजाबी बोली की मान और शान के लिए पंजाब सरकार पुरज़ोर प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा के जारी बजट सैशन के दौरान एक दिन पंजाबी मातृभाषा को समर्पित चर्चा की जायेगी। उन्होंने कहा कि हमारा अगला लक्ष्य सरकार के अलावा ग़ैर सरकारी संस्थाओं के सूचक बोर्डों पर पंजाबी भाषा को पहल देना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यदि हमारी मातृभाषा ही नहीं रहेगी तो हमारा किस बात का जीना। उन्होंने पंजाब सरकार की पंजाबी बोली, भाषा, साहित्य, सभ्याचार और समृद्ध विरासत को सँभालने और प्रफुल्लित करने की वचनबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी स्कूलों (सहित प्राईवेट) में पंजाबी का विषय पढ़ाना अनविार्य होगा।इससे पहले डॉ. सुरजीत पातर ने कहा कि आज के इस समागम में सम्मानित की गईं पंजाब की यह प्रसिद्ध हस्तियाँ हैं जिन्होंने पंजाबी भाषा के प्रचार और प्रसार में बहुमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब कला परिषद निरंतर ऐसे प्रयास करती रहेगी। उन्होंने कहा कि दिल के जज़्बातों और अंदरूनी भावना को प्रकट करने के लिए मातृ भाषा के बिना अन्य कोई और भाषा नहीं हो सकती। उन्होंने पंजाबी को रोजग़ार की भाषा बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थियों पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि यही हमारा आने वाला भविष्य है।मंच का संचालन करते हुए सचिव जनरल डॉ. लखविन्दर जौहल ने समूचे प्रोग्राम की रूप रेखा साझा की। इस समागम में ऑनलाईन कविता मुकाबलों के विजेता विद्यार्थियों हरजोत सिंह, गुरप्रीत कौर, नवजोत कौर, राहुल शर्मा और कंवलप्रीत सिंह को भी सम्मानित किया गया। पंजाब के प्रसिद्ध विद्वान डॉ. प्यारा लाल गर्ग, अमरजीत गरेवाल और सतनाम माणक ने मातृभाषा पंजाबी की महत्ता और महानता पर विस्तृत प्रकाश डाला। इस समागम के आखिऱ में गुरू हरकिशन स्कूल, पंडोरी के विद्यार्थियों द्वारा छोटे बच्चों के लिए पंजाबी कविताओं का गान किया गया।इस समागम में डॉ. जय रूप सिंह, डॉ. जसविन्दर सिंह, डॉ. हरीश पुरी, निर्मल जोढ़ा, खुशवंत बरगाड़ी, राजबीर सरां, निन्दर घुग्याणवी, बलविन्दर चाहल, दीवान माना आदि उपस्थित थे।

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