पंजाब

राजनैतिक आधार जाता देखकर सुखबीर ने दिमाग़ी संतुलन गवाया-कांगड़

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पाँच साल बाद बहबल कलां के राह पड़ा सुखबीर
चंडीगढ़ – पंजाब के कैबिनेट मंत्री श्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ ने आज यहाँ कहा कि राजनैतिक आधार जाता देखकर सुखबीर ने दिमाग़ी संतुलन गवा दिया है, जिस कारण वह बेबुनियाद बयानबाज़ी कर रहा है और बयानबाज़ी का आधार उस धार्मिक मसले को बना रहा है जिसमें सुखबीर ने स्वयं सरकार में रहते हुए कुछ नहीं किया था।श्री कांगड़ ने कहा कि पाँच साल तक सुखबीर को कभी फरीदकोट जिले के बहबल कलां का रास्ता याद नहीं आया जबकि वह ख़ुद इस हलके से लोकसभा का चुनाव लड़ चुका है। उन्होंने कहा कि मुझे सुरजीत सिंह के देहांत का बेहद अफ़सोस है और परमात्मा उनको अपने चरणों में निवास प्रदान करे। श्री कांगड़ ने कहा कि जहाँ तक मीडिया के द्वारा सुरजीत सिंह की प्राकृतिक मौत का लाभ लेने के लिए सुखबीर द्वारा मेरे विरुद्ध बयानबाज़ी की जा रही है उस संबंधी मैं स्पष्ट कर देना चाहता हुँ कि मैं कभी भी न तो सुरजीत सिंह या उसके किसी पारिवारिक सदस्य को निजी तौर पर नहीं मिला और न ही कभी उनसे फ़ोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि सुरजीत सिंह के परिवार का गाँव के ही निवासी मनजिन्दर सिंह के साथ निजी झगड़ा था।श्री कांगड़ ने स्पष्ट किया कि बीते साल अक्तूबर महीने में पूरे गाँव में बिजली विभाग द्वारा बिजली चोरी सम्बन्धी छापेमारी की गई थी। जिस दौरान सुरजीत सिंह के परिवार को भी बिजली चोरी के लिए जुर्माना हुआ था और सुरजीत सिंह का परिवार महसूस करता था कि मनजिन्दर सिंह ने उनके घर पर बिजली विभाग का छापा मरवाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न ही मैं मनजिन्दर सिंह को जानता हूँ और न ही मेरा उसके साथ कोई सम्बन्ध है।उन्होंने कहा कि बीते वर्ष अप्रैल महीने में मुझसे सरकार ने बिजली विभाग वापस लेकर राजस्व विभाग दे दिया था और मेरा बिजली विभाग के साथ कोई संबंध नहीं है। श्री कांगड़ ने कहा कि गवाहों का अपनी बात से फिरना या डराने का काम दोषी करते हैं मुद्दई नहीं। इसलिए वह क्यों उस गवाह पर अपनी बात से फिरने के लिए दबाव डालेंगे। क्योंकि हम तो इस मामले में मुद्दई बनकर सत्ता में आने से पहले संघर्ष करते रहे हैं और अब हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही रणजीत सिंह आयोग का गठन किया और आयोग की रिपोर्ट को अदालत में पेश कर दिया है और मामला सुनवाई अधीन है। इसके अलावा इस मामले में दोषी कई पुलिस अधिकारी जेल भी जा चुके हैं और सुरजीत सिंह के परिवार के साथ दुख प्रकट करते समय सुखबीर के साथ नजऱ आता अकाली नेता मनतार बराड़ भी बहबल कलां मामले में जेल से ज़मानत पर बाहर आया हुआ है।उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी सम्बन्धी सुखबीर ने आज तक कभी बहबल कलां जाकर अफ़सोस नहीं प्रकट किया और आज यह सिफऱ् राजनैतिक लाभ लेने के लिए झूठी बयानबाज़ी कर रहा है।श्री कांगड़ ने कहा कि सुखबीर द्वारा की जा रही बयानबाज़ी का असली कारण भाजपा द्वारा दिल्ली में बुलाई गई फतेह है क्योंकि वह पहले टकसाली द्वारा दिए गए ज़ख्मों से ही नहीं उभरा था कि भाजपा ने नयी मुसीबत खड़ी कर दी है।इस मौके पर बोलते हुए फऱीदकोट से विधायक श्री कुशलदीप सिंह ढिल्लों (किक्की ढिल्लों) ने कहा कि सुखबीर और उसके चमचों को हमसे निजी खुन्नस है जिस कारण वह बिना किसी आधार के हमारा नाम इस मामले में उछाल रहा है। उन्होंने कहा कि सुखबीर के बयान कितने सच्चे होते हैं यह तो सभी लोग जानते हैं और इसका एक सबूत इस बात से लिया जा सकता है कि उसने तो बहबल कलां मामले सम्बन्धी गठित रणजीत सिंह आयोग सम्बन्धी विधानसभा के फ्लोर पर झूठ बोला था और विशेष अधिकार समिति की तरफ से मामले की पड़ताल के उपरांत उसको दोषी मानते हुए उसके खि़लाफ़ कार्यवाही करने के लिए स्पीकर को लिखा था और स्पीकर ने अब सुखबीर पर कार्यवाही करने के लिए लोकसभा स्पीकर को लिख दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब बहबल कलां कांड हुआ था तो हम कैप्टन साहिब के नेतृत्व में बहबल कलां गए थे और पीडि़त परिवारों के साथ भी दुख साझा किया था।उन्होंने कहा कि सुखबीर द्वारा ख़ुद सत्ता में होते हुए जोरा सिंह कमीशन गठित किया था और हमारी सरकार द्वारा बनाए गए रणजीत सिंह आयोग द्वारा सुखबीर और अकाली नेताओं के खि़लाफ़ इस मामले में गलत भूमिका निभाने की रिपोर्ट पेश की थी और अब हमें आशा है कि अदालत हमें इंसाफ देगी।श्री ढिल्लों ने कहा कि इस मामले में सामने आ रहे नाम मनजिन्दर सिंह के साथ सुरजीत सिंह के परिवार का निजी झगड़ा था और एक बार सुरजीत सिंह की शिकायत पर मनजिन्दर सिंह पर 7/51 का मामला दर्ज हुआ था और वह ज़मानत पर बाहर आया था। इसके अलावा सुरजीत सिंह को राज्य सरकार ने सुरक्षा के लिए तीन पुलिस मुलाजि़म मुहैया करवाए थे। उन्होंने कहा कि लोग तो सुखबीर बादल की बातों को कॉमेडी शो का हिस्सा मानते हैं।अंत में दोनों नेताओं ने सुखबीर बादल को चैलेंज किया कि अगर वह सच्चा है तो हमारे खि़लाफ़ दोष साबित करे और अगर वह ऐसा कर देता है तो हम राजनीति से किनारा कर लेंगे और अगर यह दोष वह साबित न कर सका तो वह इस्तीफ़ा दे।

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