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पंजाब के मंत्रियों ने बादलों को अकाली दल पर पैदाइशी कब्ज़े के लिए निशाने पर लिया

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बादलों की महंतों के साथ तुलना की जिनसे गुरुद्वारों को आज़ाद करवाने के लिए अकालियों ने ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी
चंडीगढ़ – शिरोमणि अकाली दल के अंदर सुखबीर बादल के विरुद्ध बढ़ते भारी विरोध के चलते पंजाब के कई मंत्रियों ने रविवार को अकाली दल पर निशाना साधा जिस पर बादलों के पूरी तरह निजी कंट्रोल को मुक्त करने की ज़रूरत है।कैबिनेट मंत्रियों तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा (ग्रामीण विकास व पंचायतें), सुखबिन्दर सिंह सरकारिया (आवास निर्माण और शहरी विकास) और गुरप्रीत सिंह कांगड़ (राजस्व) ने सुखबीर बादल की पत्नी और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के पार्टी के प्रांतीय मामलों में बढ़ते दख़ल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि अकाली दल की कोर कमेटी की मीटिंग में हरसिमरत बादल का बिना मैंबर से बैठना उसके बढ़ते दख़ल की निशानी है।मंत्रियों ने कहा हद तो यह हो गई कि जिन अकालियों ने 20वीं सदी के शुरू में गुरुद्वारों पर काबिज़ महंतों से गुरूधामों को आज़ाद करवाने के लिए ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी, आज उसी अकाली दल पर बादल परिवार ने महंतों की तजऱ् पर पैदाइशी कब्ज़ा किया हुआ है।उन्होंने पूछा, ‘ब्रिटिश भारत के समय पर महंतों /उदासियों द्वारा उत्साहित की ख़ानदानी परंपरा और बादलों के बीच क्या अंतर है जो खुलेआम निडर होकर एक ही जैसे सभ्याचार की पालना कर रहे हैं जिससे अकाली दल पर परिवार का कब्ज़ा कायम रहे?’मंत्रियों ने कहा कि हरसिमरत की केंद्रीय मंत्री के तौर पर किये जा सकने वाले अहम कामों की कीमतों पर अकाली दल और पंजाब मामलों में बढ़ती शमूलियत इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी के नेता और वर्कर सुखबीर की लीडरशिप से खुश नहीं हैं।ढींडसा पिता-पुत्र की जोड़ी, जिनको पहले ही पार्टी में से मुअत्तल कर दिया गया है, की बग़ावत की तरफ इशारा करते हुये उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के समय के बाद शिरोमणि अकाली दल पूरी तरह उथल-पुथल हो गया। गौरतलब है कि शनिवार को कोर कमेटी की मीटिंग में संसद मैंबर सुखदेव सिंह ढींडसा और उनके विधायक पुत्र परमिन्दर सिंह ढींडसा को शिरोमणि अकाली दल में से मुअत्तल कर दिया गया था, जिस मीटिंग में हरसिमरत कौर बादल भी मौजूद थी।ढींडसा ने बादलों की तरफ से अकाली दल के असहनीय नियंत्रण के विरुद्ध खुलेआम बागवत की थी और पार्टी को बादल परिवार के चंगुल से आज़ाद करवाने और इसकी खो चुकी साख को फिर सुरजीत करने के अपने इरादे के ऐलान के संदर्भ में बोलते हुये मंत्रियों ने कहा कि यही बयान सुखबीर के नेतृत्व के विरुद्ध पार्टी में बढ़ रही भटकना और पार्टी में स्वतंत्रता की कमी की ताज़ा मिसाल है। उन्होंने चुटकी लेते हुये कहा कि अगर पार्टी के सीनियर नेता लीडरशिप और विचारधारा की कमी से इतने नाखुश हैं, तो हम सिफऱ् अंदाज़ा ही लगा सकते हैं कि पार्टी के आम वर्कर कितने असंतुष्ट होंगे।

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