पंजाब
हम अनजान नहीं हैं -कैप्टन अमरिन्दर सिंह
सी.ए.ए. संबंधी केरल विधान सभा द्वारा पास किये प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी का मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केरल विधान सभा द्वारा विवादास्पद नागिरकता संशोधन एक्ट (सी.ए.ए.) में संशोधन करने की माँग को लेकर पास किये प्रस्ताव के हक में उतरते हुए इस प्रस्ताव को आवाम की आवाज़ करार दिया है और केंद्र सरकार को यह आवाज़ सुनने की अपील की है।मुख्यमंत्री ने यह बात केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री द्वारा इस मुद्दे पर दिए बयान के संदर्भ में कही।कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को लिखे खुले पत्र में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि जो राज्य सी.ए.ए. का विरोध कर रहे हैं, उन राज्यों के राजनीतिज्ञों को ऐसा स्टैंड लेने से पहले उचित कानूनी सलाह लेनी चाहिए।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि राज्यों ने अपेक्षित कानूनी सलाह पहले ही ली हुई है और केरल विधान सभा के प्रस्ताव के साथ लोगों ने अपने चुने हुए नुमायंदों के द्वारा अपनी सूझ-बूझ और इरादों को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे विधायक लोक आवाज़ की नुमायंदगी करते हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह सिफऱ् संसदीय अधिकारों का मुद्दा नहीं है बल्कि ऐसे विचारों को दर्शाना वहाँ के नुमायंदों का संवैधानिक फज़ऱ् होता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि जि़म्मेदार राज्य सरकारों के प्रमुख होने के नाते हम न तो अनजान हैं और न ही गुमराह हुए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों पर कानून जबरदस्ती नहीं थोपे जा सकते और सभी शक्तियों की तरह संसदीय शक्ति की ड्यूटी भी इसको जि़म्मेदारी के साथ निभाने की है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि धारा 245 अधीन नागरिकता से सम्बन्धित कानून पास करने की कानूनी शक्ति सिफऱ् संसद के पास है न कि राज्यों के पास जबकि केंद्रीय कानून मंत्री ने केरल विधान सभा द्वारा पास किये प्रस्ताव में इस नुक्ते को दरकिनार कर दिया कि विधान सभा ने कोई नागरिता कानून पास नहीं किया बल्कि भारत सरकार को संसद में सी.ए.ए. में संशोधन करने की अपील की है जहाँ उसके पास बहुमत है।