पंजाब
इजऱाईली लोगों के समर्पण और वचनबद्धता की भावना ने हमेशा हमलों का मुकाबला करने में उनकी सहायता की
माहिरों ने ‘डिफैंडिंग अगेंस्ट फारमिडेबल आडज़: द गोलन हाइट्स, 1973 ’ विषय पर चर्चा करके जंग के भावुक पल सांझे किये
चंडीगढ़ – इजराइली लोगों के समर्पण और साहसी वचनबद्धता की भावना ने हमेशा ही उनको अरब देशों द्वारा किये गये हमलों का डट कर मुकाबला में मदद की है। यहाँ तक कि जंग के दौरान उन्होंने बहुत फुर्ती से टैंकों की मुरम्मत और नवीनीकरन करके हथियारों से लैस दुश्मन का मुकाबला किया।मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल -2019 के आखिरी दिन माहिरों ने ‘डिफैंडिंग अगेंस्ट फारमिडेबल आडज़: द गोलन हाइट्स, 1973’ के विषय पर विचार-चर्चा करते हुये इजऱाईलियों के राष्ट्रवाद की भावना की सराहना की। विचार-विमर्श के दौरान स्पीकर मेजर जनरल योसी बेन -हैनन ने प्रेरणादायक पेशकारी के साथ अपने जंग के तजुर्बे भी सांझे किये।विचार-विमर्श की शुरुआत करते हुये संचालक लेफ्टिनेंट जनरल के.जे सिंह ने कहा कि इजराइली नौजवान अपनी देश की सेवा करने के लिए फ़ौज में भर्ती होने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं और वह मातृभूमि पर अपनी जान कुर्बान करने से भी संकोच नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई अपने देश की सुरक्षा के लिए काम करना चाहता है तो प्रेरणा लेने के लिए इजराइली लोग प्राथमिक दर्जे की उदाहरणों में से एक हैं।इजराइली मेजर जनरल योशी बेन -हानन ने जंग में अपने दिनों संबंधी बताते हुए कहा कि उनके पास शुरुआत में सिफऱ् 10 टैंक थे परन्तु जब उन्होंने दुश्मन के टैंकों को निशाना बना कर अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया तो अन्य बटालियनों के टैंक भी उनके साथ आ मिले। उन्होंने बताया कि अपने 10 टैंकों के साथ उन्होंने दुश्मन के 90 से अधिक टैंकों को निशाना बनाया था।इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल आई एस सिंहा ने भी इजराइली नौजवानों की इस भावना की प्रशंसा करते हुये बताया कि हर साल 60,000 लडक़े और 60,000 लड़कियाँ फ़ौज की सेवा के लिए कुआलीफायी करते हैं जोकि भारत जैसे देशों के लिए एक और प्रेरणादायक पहलू है। उन्होंने कहा कि यह धर्म नहीं है जो उनको एकजुटता में बांधता है, यह उनकी भाषा है जो उनमें राष्ट्रवाद की भावना को भर्ती है।युद्ध के हालातों संबंधी बात करते हुये लेफ्टिनेंट जनरल आई.एस. सिंह ने दावा किया कि किसी भी फ़ौज को युद्ध के लिए तैयार होने के लिए 10 दिनों की आगामी सूचना की ज़रूरत होती है परन्तु ख़ुफिय़ा एजेंसियों की असफलता के कारण इजराइल को कुछ ही घंटों का नोटिस मिला। उन्होंने आगे कहा कि एक ख़ुफिय़ा अफ़सर को कभी भी अति विश्वाशपूर्ण नहीं होना चाहिए क्योंकि युद्ध के नतीजे उसकी तरफ से की गई कार्यवाही पर ज़्यादा निर्भर करते हैं।