पंजाब

पंजाब मंत्रीमंडल द्वारा ग़ैर कृषि मंतव्य के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नदियों/नहरी पानी की कीमतों पर पुन: विचार का फैसला

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हरियाणा के पैटर्न पर कीमतें सुधारने का फ़ैसला, राजस्व 24 करोड़ रुपए से बढक़र 319 करोड़ रुपए तक पहुँचने की संभावना
चंडीगढ़ – राजस्व को बढ़ाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा कृषि के अलावा अन्य मंतव्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नदियों/नहरी पानी की कीमतें सुधारने का फ़ैसला किया है।यह फ़ैसला बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व अधीन हुई मंत्रीमंडल की मीटिंग में लिया गया।मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित कीमतें पड़ोसी राज्य हरियाणा के बराबर होंगी और इन संशोधनों से राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस समय पर जो 24 करोड़ रुपए प्रति वर्ष राजस्व इक_ा होता है, प्रस्तावित वृद्धि से यह राजस्व बढक़र 319 करोड़ रुपए प्रति वर्ष होने की संभावना है।यह फ़ैसला इस बात को ध्यान में रख कर लिया गया है कि राज्य सरकार को आय के स्रोतों को बढ़ाने की ज़रूरत है और इसके साथ ही राज्य में फैले 14,500 किलोमीटर लम्बे नहरी नैटवर्क को मज़बूत करना है जो कि समय बीतने के साथ बिगड़ा है। प्रवक्ता ने बताया कि ज़्यादातर रजबाहे और खाले 30 से 40 साल पहले 1980 दशक में बने थे और जिनको वर्ष में दो बार रेगुलर सफ़ाई की ज़रूरत पड़ती है जिससे नहरी पानी व्यवस्था प्रभावशाली तरीके से चलाई जा सके और टेलों पर पानी पहुँचाया जाये।जि़क्रयोग्य है कि जल स्रोत विभाग सिंचाई के अलावा विभिन्न संस्थाओं जैसे कि थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, नगर निगमों को नदियों और नहरों के द्वारा थोक में पानी की सप्लाई करता है।इसी तरह पीने वाले पानी और बोतलबन्द पानी उद्योग, पीने वाले पानी की सप्लाई (समेत रेलवे और सेना), मछली तालाब, ईंटें बनाना और निर्माण के लिए पानी का प्रयोग वाले पानी का थोक में काम करते हैं।

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