पंजाब

दशहरा 2018 रेल हादसे में छह पुलिस कर्मियों के खि़लाफ़ पहले ही कार्यवाही आरंभ की गई और 7 नगर निगम कर्मचारियों को चार्जशीट किया: कैप्टन अमरिन्दर सिंह

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मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर कार्यवाही न करने के दोषों को नकारा
‘जांच रिपोर्ट पर कार्यवाही को अनदेखा करने का सवाल ही नहीं पैदा होता’

चंडीगढ़ – दशहरा 2018 रेल हादसे में राज्य सरकार द्वारा कार्यवाही न करने की मीडिया रिपोर्टों को रद्द करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को कहा है कि छह पुलिस कर्मियों के खि़लाफ़ पहले ही विभागीय कार्यवाही आरंभ की हुई है जबकि नगर निगम अमृतसर के सात कर्मचारियों को इस मामले में चार्जशीट जारी की हुई है।
मैजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट के अनुसार इन पुलिस कर्मियों और नगर निगम के कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी निभाने में लापरवाही की और इनके खि़लाफ़ अपेक्षित कार्यवाही के आदेश दिए थे। 19 अक्तूबर 2018 को घटी इस दुर्घटना की मैजिस्ट्रेट जांच मुख्यमंत्री के आदेशों पर जालंधर डिवीजऩ के कमिश्नर बी.पुरूषार्थ ने की थी। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में 58 लोगों की मौत हो गई थी और 71 ज़ख्मी हो गए थे।
हाल ही में प्रकाशित ताज़ा रिपोर्टों का नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार दोषी पाए जाने वालों के खि़लाफ़ बनती कार्यवाही की जा रही है और जांच रिपोर्ट को अनदेखा करने का सवाल ही नहीं पैदा होता जैसे कि मीडिया के एक हिस्से ने राज्य सरकार पर दोष लगाए हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस और स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को सही उपायों का सुझाव देने के लिए विस्तार में दिशा निर्देश जारी किये हैं जिनमें ऐसे समागमों की आज्ञा देने के लिए सिंगल विंडो प्रणाली स्थापित करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे समागमों के लिए अमृतसर, लुधियाना और जालंधर के पुलिस कमीश्नरों के अलावा दूसरे क्षेत्रों के एस.डी.एम्ज़ को सिंगल अथॉरिटी नियुक्त किया गया है।
ऐसे समागमों के लिए प्रबंधकों को सभी ज़रूरी जानकारी वाली चैक लिस्ट सूची सहित समागम से कम-से-कम 15 दिन पहले आवेदन पत्र देना होगा। प्रबंधकों को सुरक्षा, फायर टैंडरों, सफ़ाई आदि के लिए भुगतान देना होगा। इसके अलावा ऐसे समागमों की वीडियोग्राफी करना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने यह भी शर्त रखी थी कि यदि सरकारी ज़मीन पर समागम करवाना है तो सम्बन्धित विभाग की आज्ञा भी ज़रूरी है।
जि़क्रयोग्य है कि मुख्यमंत्री ने हादसे के तुरंत बाद हर मृतक के वारिस को 5 लाख रुपए और ज़ख्मी को 50 हज़ार रुपए मुआवज़ा देने के हुक्म दिए थे। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मृतकों के वारिसों को मुआवज़े के लिए डिप्टी कमिश्नर अमृतसर को 2.9 करोड़ रुपए जारी कर दिए थे जिसमें से 2.6 करोड़ रुपए बाँटे जा चुके हैं। एक मामला जिसमें एक ही परिवार के सभी चार सदस्य मारे गए थे, उनके परिवार के किसी कानूनी वारिस की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके अलावा एक मृतक के कानूनी वारिस की पहचान विवादपूर्ण हो गई थी और एक अन्य पीडि़त की अभी तक पहचान नहीं हो सकी।
प्रवक्ता ने बताया कि 71 ज़खि़्मयों में से 3 ज़खि़्मयों को मुआवज़ा देने का मामला अभी प्रक्रिया अधीन है क्योंकि उनका रिहायशी पता उपलब्ध नहीं हो सका। उनके वैकल्पिक स्थानों को ढूँढने की कोशिशें की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे समागमों के प्रबंधन और निगरानी में किसी किस्म की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके साथ ही उन्होंने त्योहारों के मौसम के मद्देनजऱ लोगों से अपील की कि वह संयम से काम लें और सारी सावधानियों का पालन करना यकीनी बनाएं। प्रशासन की तरफ से ऐसे समागमों की सुरक्षा के मामले में ज़रुरी यत्न किये जा रहे हैं।

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