पंजाब

सुखबीर बादल अपने संकुचित राजनैतिक हितों की पूर्ति के लिए सिख संगत को गुमराह करने से गुरेज़ करे -तृप्त बाजवा

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दसवीं पातशाही का 350वां प्रकाश पर्व बिहार सरकार ने ही मनाया था

चंडीगढ़ – पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने आज कहा कि सुखबीर बादल के इस बयान में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है कि जनवरी 2017 में पटना साहिब में मनाए गए श्री गुरु गोबिन्द सिंह के 350वें प्रकाश पर्व का मुख्य समागम शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा मनाया गया था। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल को कहा है कि वह श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर अपने परिवार की नेतागिरी कायम करने की लालसा में सिख संगत को गुमराह करने से गुरेज़ करें।श्री बाजवा ने आज यहाँ एक लिखित प्रैस बयान में कहा है कि पटना साहिब में मनाए गए श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के मौके पर करवाया गया मुख्य समागम वहाँ के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार द्वारा मनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस समागम में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, बिहार के राज्यपाल श्री रामनाथ कोविन्द, बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार, पंजाब के समकालीन मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल ने संगत को संबोधन किया था और शिरामणि कमेटी के प्रधान ने महज़ संगतों का धन्यवाद किया था। उन्होंने कहा कि इस मुख्य समागम का संचालन बिहार सरकार की तरफ से पंजाबी यूनिवर्सिटी के उस समय के उप कुलपति डॉ. जसपाल सिंह को सौंपा गया था।पंचायत मंत्री ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को इस संबंधी सब कुछ अच्छी तरह मालूम है क्योंकि वह उस समय स्टेज के सामने अपनी पत्नी और उस समय की केंद्रीय मंंत्री हरसिमरत कौर बादल सहित संगत में बैठे थे। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल इस धार्मिक और बहुत ही नाजुक मामले बारे इसलिए झूठ बोल रहे हैं ताकि अगले महीने मनाए जा रहे बाब नानक के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर होने वाले ऐतिहासिक समागम में शिरोमणी कमेटी के द्वारा अपने परिवार की नेतागीरी कायम कर सकें।श्री बाजवा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को यह याद होना चाहिए कि 1999 में मनायी गई खालसा पंथ की तीसरी शताब्दी भी पंजाब सरकार ने ही मनायी थी और 2007 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब का 300वां गुरगद्दी दिवस नांदेड़ साहिब में महाराष्ट्र सरकार द्वारा मनाया गया था।पंचायत मंत्री ने कहा कि 1999 में तीसरी खालसा जन्म शताब्दी के समागमों में अपनी नेतागीरी स्थापित करने के लिए ही बादल परिवार ने श्री अकाल तख़्त साहिब के हुक्मनामे का उल्लंघन करके पहले जत्थेदार गुरचरण सिंह टौहड़ा को पद से उतारा और फिर भाई रणजीत सिंह को अकाल तख़्त साहिब की जत्थेदारी से एक तरफ़ किया। उन्होंने सुखबीर बादल को याद करवाया कि सिख पंथ के सिद्धांतों और परंपराओं का घोर उल्लंघन करने के कारण ही उनको इस समागम से कुछ महीने बाद हुए लोकसभा चुनावों में शर्मनाक हार का मुँह देखना पड़ा था। इस चुनाव में सुखबीर सिंह बादल सहित शिरोमणी अकाली दल के एक उम्मीदवार को छोडक़र बाकी सभी उम्मीदवार हार गए थे।श्री बाजवा ने कहा कि पंजाब सरकार और शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्री गुरु नानक देव जी का यह ऐतिहासिक पर्व साझे तौर पर मनाने में सबसे बड़ी रुकावट बादल परिवार ही है जो अपने संकुचित राजनैतिक हितों की पूर्ति के लिए बहुत बेशर्मी से शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सभी माली और मानवीय साधन इस्तेमाल कर रहा है।पंचायत मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार श्री अकाल तख़्त साहिब की भावना के अनुसार यह ऐतिहासिक गुरूपर्व शिरोमणी कमेटी के साथ मिलकर मनाना चाहती है, परन्तु यह तब ही संभव होगा यदि शिरोमणी कमेटी के मौजूदा प्रधान और अन्य अधिकारी खालसा पंथ की इस महान संस्था को बादल परिवार के चंगुल में से निकाल कर सिख जगत की भावनाओं के अनुसार चलाएं।

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