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पंजाब राज्य आई.ए.एस. ऑफिसजऱ् एसोसिएशन ने अपनी सामाजिक वचनबद्धता दोहराई अंग दान के नेक काम को किया उत्साहित

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चंडीगढ़ – सामाजिक जि़म्मेदारी निभाते हुए, पंजाब राज्य आई.ए.एस. ऑफिसजऱ् एसोसिएशन ने अपने सदस्यों के दरमियान मरने के उपरांत अंग दान करने के नेक काम को उत्साहित करने का प्रशंसनीय प्रयास किया है और सोमवार को महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ऐडमिनस्ट्रेशन में रीजनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट संस्था (रोटो) पी.जी.आई. के सहयोग से ओरिएन्टेशन सैशन का आयोजन किया।इस सैशन के दौरान पंजाब के उच्च आई.ए.एस. अधिकारी जिनमें अनिरुद्ध तिवाड़ी, तेजवीर सिंह, गुरप्रीत सपरा, अमृत कौर, हुसन लाल, रजत अग्रवाल, सिबन सी, तनु कश्यप और गिरिश दियालन शामिल थे, के अलावा कई आई.ए.एस. अधिकारियों ने शिरकत की। इस सैशन की अध्यक्षता पंजाब राज्य आई.ए.एस ऑफिसजऱ् एसोशिएशन के प्रधान विनी महाजन ने की।प्रो. ए.के. गुप्ता मैडीकल सुपरडैंट कम हैड, हॉसपिटल ऐडमिनस्ट्रे्रशन विभाग, पी.जी.आई. इस मौके पर गेस्ट स्पीकर के तौर पर मौजूद थे।उद्घाटनी समागम के दौरान संबोधन करते हुए विनी महाजन ने कहा, ‘‘ इस तथ्य को विचारते हुए कि अंग दान कम होने का कारण यह नहीं कि इच्छुक दानी की कमी है बल्कि इच्छुक दानी जानकारी, जागरूकता और सामाजिक-संस्कृतिक विचारों की कमी के कारण अंग दान नहीं कर पाते। इसलिए यह नेक काम सरकार, स्वास्थ्य संभाल पेशेवरों, समूचे भाईचारे और ग़ैर सरकारी संगठनों के संगठित और निरंतर यत्नों की माँग करता है।’’श्रीमती महाजन ने इस उद्देश्य की तरफ समूचे भाईचारे के सम्मिलन को उत्साहित करने के लिए उत्तम पहलकदमियों की ज़रूरत की हिमायत की और राज्य में मरने के उपरांत अंग दान करने को बढ़ावा देने के लिए एसोशिएशन के संपूर्ण समर्थन का भरोसा दिया।इस मौके पर बोलते हुए प्रो. (डा.) ए.के गुप्ता ने इस बात पर रौशनी डाली, ‘‘ जहाँ हमारे देश में 5 लाख से ज़्यादा लोग अंग बदलवाने का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं अंग दान के प्रति जागरूकता फैलाकर अंग बेकार होने से पीडि़त और लगातार दर्द में रह रहे व्यक्तियों के लिए वरदान साबित हो सकता है। ट्रांसप्लांटेशन प्रोग्रामों को लागू करने सम्बन्धी प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. गुप्ता ने एक रूप-रेखा साझी की जिसमें इस उद्देश्य के लिए आई.सी.यू/एैमरजैंसी स्टाफ के लिए अपेक्षित बुनियादी ढांचा तैयार करने, प्रशिक्षण और जागरूक करने, अस्पतालों को ट्रांसप्लांटेशन सैंटरों के तौर पर रजिस्टर करने, दिमाग़ी मौत सम्बन्धी मामलों और इस उद्देश्य सम्बन्धी लोगों को शिक्षित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। प्रो. गुप्ता ने मरने के उपरांत अंग दान करने के क्षेत्र में पी.जी.आई. चंडीगढ़ की सफलता की कहानियाँ भी साझी की।पंजाब राज्य आई.ए.एस. अफसरों की एसोसिएशन की इस उद्देश्य के प्रति वचनबद्धता की प्रशंसा करते हुए प्रो. गुप्ता ने कहा, ‘‘उच्च लीडरशिप की मौजुदगी और गहरी रूचि एक सकारात्मक संदेश देती है और सैशन के प्रभावशाली आयोजन को देखते हुए अंग दान उत्साहित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर मदद मिलेगी।’’इस सैशन के दौरान चंडीगढ़ से गांधी परिवार विशेष तौर पर शामिल था, जिन्होंने साल 2013 में अपने 21 वर्षीय पुत्र पर्थ के मरने के उपरांत अंग दान किये जिससे चार अंग बेकार हो चुके मरीजों को दूसरा जीवन मिला और साथ ही दो अन्य मरीज़ों को दुनिया देखने का मौका मिला और इस तरह दिल, लीवर, किडनियों और कॉरनियों के दान से 6 जिंदगीयों को नया जीवन मिला।जब दानी पर्थ के पिता श्री संजय गांधी ने बताया कि किस तरह उसके बच्चे ने अंग दान का यह मुश्किल फ़ैसला लिया तो हॉल में बैठे लोगों की आँखें भर आईं।इससे पहले सैशन को संबोधन करते हुए पंजाब स्टेट आई.ए.एस. ऑफिसजऱ् एसोसिएशन के कार्यकारी मैंबर कविता सिंह ने कहा, ‘‘ ज़रूरतमन्दों को वास्तव में अंग दान करके उनको नयी जि़ंदगी देने से बड़ा पुण्य और कोई नहीं।’’ राज्य में अंग दान/ ट्रांसप्लांटेशन गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी के साथ जुडक़र अंग दान के इस सर्व उपकारी उद्देश्य की तरफ ध्यान केंद्रित करने और इस तरह कीमती जानें बचाने के इरादे से इस सैशन को आयोजित करने का प्रयास किया गया।इस सैशन का विशेष हिस्सा सवाल जवाब सैशन था जिसमें भागीदारों के दरमियान और ज्य़ादा उत्साह देखने को मिला। इस सैशन के अंत में भागीदारों ने अंग दान करने संबंधी संकल्प लिया और अधिकारियों और उनकी संस्थाओं द्वारा 500 फार्म भरे गए।

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