पंजाब
पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित गाँवों में प्राकृतिक आपदा घोषित की; मुख्यमंत्री ने वित्त कमिश्नर
राजस्व को तुरंत नोटिफिकेशन जारी करने के दिए हुक्म
कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा फ़सलीय नुक्सान के लिए बकाया मुआवज़ा तुरंत जारी करने के हुक्म
चंडीगढ़ – पंजाब सरकार ने सोमवार को राज्य के बाढ़ प्रभावित गाँवों में प्राकृतिक आपदा का ऐलान कर दिया है और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वित्त कमिश्नर राजस्व को इस सम्बन्धी तुरंत ही नोटिफिकेशन जारी करने के हुक्म दिए हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वित्त कमिश्नर राजस्व को अधिकारित तौर पर एक गाँव को एक यूनिट मानकर मौजूदा बाढ़ को तुरंत प्राकृतिक आपदा घोषित करने के निर्देश दिए हैं जिससे बाढ़ से प्रभावित लोगों को अलग -अलग कंपनियों से बीमे का दावा करने में सुविधा हासिल हो।राज्य में बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए अपने सरकारी रिहायश में शाम को बुलायी उच्च स्तरीय मीटिंग में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने वित्त विभाग को तकरीबन 100 करोड़ रुपए के बकाया फंड तुरंत जारी करने के लिए कहा जो कि पिछली फसलों /कटाई सम्बन्धी हैं जिससे राजस्व विभाग द्वारा सम्बन्धित डिप्टी कमीश्नरों के द्वारा इनकी तेज़ी से बाँट की जा सके।कैप्टन अमरिन्दर सिंह जिन्होंने आज प्रात:काल ज़मीनी हकीकतों का जायज़ा लेने के लिए रूपनगर जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया, ने समूह डिप्टी कमीश्नरों को निर्देश दिए कि पुलिस, एन.डी.आर.एफ., एस.डी.आर.एफ. और राज्य सरकार के अन्य विभागों के साथ सभ्य तालमेल बनाकर स्थिति पर नजऱ रखी जाए जिससे न सिफऱ् राहत कार्यों में तेज़ी लाई जा सके बल्कि बाढ़ की रोकथाम के लिए इंतज़ाम भी किये जा सकें।मुख्यमंत्री ने यह भी दिशा निर्देश दिए कि निर्धारित नियमों के मुताबिक मुआवज़े की बाँट ख़ासकर मृत्यु के मामलों में मृतक के वारिसों को तेज़ी से की जाये जबकि प्रवासी मज़दूरों को अस्थायी गुज़ारा भत्ता दिया जाये जो कि राज्य की नीति के अनुसार मौजूदा राहत नियमों अधीन नहीं आते। उन्होंने कहा कि यह राहत मुख्यमंत्री के राहत फंड में से दी जायेगी।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ड्रेनेज विभाग को सेना की मदद से दरार भरने के तुरंत निर्देश दिए और इसके साथ ही समूह डिप्टी कमीश्नरों को डैमों के फलड्ड गेट खोलने की सूरत में और ज्यादा चौकस रहने के हुक्म भी दिए।मीटिंग में यह भी फ़ैसला लिया गया कि मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्य सचिव द्वारा चंडीमंदिर की पश्चिमी कमांड के आर्मी कमांडर के कार्यालय के साथ पूर्ण तालमेल रखा जाये और उनको सेना सहायता सम्बन्धी राज्य की ज़रूरतों से अवगत करवाया जाये। सम्बन्धित डिप्टी कमिश्नर अपने स्तर पर हालात को देखते हुए विनती भेजेंगे।इसके अलावा मुख्यमंत्री ने नहरी प्रशासन, सिंचाई /जल स्रोत विभाग के ड्रेनेज विंगों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के लिए कहा जिससे नहरों में पानी छोडऩा यकीनी बनाया जा सके और नदियों में पानी का बहाव संतुलन में रहे। रावी नदी पर रणजीत सागर डैम के सम्बन्ध में, जिसका प्रबंध और चलाने सम्बन्धी अधिकार राज्य के जल स्रोत /सिंचाई विभाग और पावरकॉम के पास हैं, स्थिति को नज़दीक से पढ़ा जाये जिससे पानी छोडऩे सम्बन्धी उचित प्रबंध किए जा सकें और इसके अलावा फलड्ड गेट खोलने से पहले अग्रिम सूचना दी जा सके।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस मौके पर विभिन्न विभागों जिसमें स्वास्थ्य विभाग और पशु पालन विभाग भी शामिल हैं, को बाढ़ प्रभावित गाँवों में दवाएँ और जानवरों के लिए चारा मुहैया करना यकीनी बनाने के निर्देश दिए।इससे पहले मुख्यमंत्री को राज्य की बाढ़ की स्थिति संबंधी जानकारी देते हुए राज्य के मुख्य सचिव ने कहा कि सारी स्थिति पर नजऱ रखी जा रही है और राहत एवं बचाव कार्य तनदेही के साथ जारी हैं। वित्त कमिश्नर राजस्व ने मुख्यमंत्री को यह भी जानकारी दी कि आपदा से निपटने के लिए ज़रुरी फंड की कोई कमी नहीं है और समूह डिप्टी कमीश्नरों को भी 20 लाख रुपए प्रत्येक के हिसाब से अग्रिम तौर पर फंड अलॉट किये गए हैं जिससे बाढ़ से बचाव के कार्य तेज़ी से पूरे किये जा सकें।मीटिंग में जल स्रोत मंत्री श्री सुखबिन्दर सिंह सरकारिया, राजस्व मंत्री श्री गुरप्रीत सिंह कांगड़, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव श्री सुरेश कुमार, मुख्य सचिव श्री करन अवतार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री तेजवीर सिंह, विशेष मुख्य सचिव कम वित्त कमिश्नर राजस्व श्री के.बी.एस. सिद्धू, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) श्री सतीश चंद्र, डी.जी.पी. श्री दिनकर गुप्ता, प्रमुख सचिव (जल स्रोत) श्री सरवजीत सिंह, सचिव (खर्चा) श्री वी.एन.ज़ादे, विशेष सचिव (राजस्व) श्री राजीव पराशर और चीफ़ इंजीनियर ड्रेनेज श्री संजीव गुप्ता भी उपस्थित थे।