पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा दिल्ली में श्री गुरु रविदास मंदिर के तोड़ फोड़ से पैदा हुए तनाव को सुलझाने के लिए प्रधान मंत्री के निजी दख़ल की मांग

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मामले की पैरवी करने और उसी जगह मंदिर के फिर से निर्माण के लिए रविदास भाईचारे को कानूनी और वित्तीय सहायता देने का भरोसा
चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट के हुक्मों पर दिल्ली के गाँव तुगलकाबाद में स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर और समाधी को हाल ही में ढाहने से रविदास भाईचारे में पैदा हुए तनाव को हल करने के लिए वह निजी तौर पर दख़ल दें मुख्यमंत्री ने यह अपील गुरू रविदास जयंती समारोह समिति के बैनर तले भाईचारे के सदस्यों की तरफ से किये राज्य स्तरीय प्रदर्शनों के बाद की जिन्होंने 13 अगस्त को देश बंद का न्योता दिया और 15 अगस्त को काले दिन के तौर पर मनाने का ऐलान किया।प्रदर्शनों का गंभीर नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे वह सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते जो इस धार्मिक ढांचे के तोड़ फोड़ का कारण बना परन्तु वह निजी तौर पर ऐतिहासिक महत्ता वाले किसी भी स्मारक या ढांचे के तोड़ फोड़ के हक में नहीं हैं जिससे किसी भी भाईचारे की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचती हो।मुख्यमंत्री ने भाईचारे को अपने प्रदर्शन बंद करने की अपील की है क्योंकि उनकी सरकार केंद्र सरकार के साथ इस मसले का सुखदाई हल निकालने के लिए भाईचारे को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। प्रधान मंत्री को इस संवेदनशील मुद्दे के हल के लिए दख़ल देने की अपील करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ निजी तौर पर बातचीत करके यह जगा फिर से अलॉट करने की माँग की ताकि भाईचारे द्वारा सरोवर सहित मंदिर का फिर से निर्माण किया जा सके जिसको गिरा दिया गया था। यह जगह दिल्ली विकास अथॉरिटी से सम्बन्धित है।श्री गुरु रविदास जी के साथ जुड़ी कथाएं यह दर्शाती हैं कि उन्होंने वर्ष 1509 के लगभग सिकंदर लोधी की शासन के दौरान इस पवित्र स्थान की यात्रा की थी।इस मामले की पैरवी करने और गिराए गए ढांचे का उसी जगह पर फिर से निर्माण करने के लिए भाईचारे को कानूनी और वित्तीय सहायता मुहैया करवाने का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री ने पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया है जो भाईचारे के धार्मिक और राजनैतिक नुमायंदों को मिलने के अलावा केंद्र के साथ इस मसले को सुलझाने के लिए व्यापक रणनीति भी तैयार करेगी। यह समिति चौधरी संतोख सिंह, चरनजीत सिंह चन्नी, राज कुमार चब्बेवाल, अरुणा चौधरी और सुशील कुमार रिंकू पर आधारित है।मुख्यमंत्री ने इस स्थान की पवित्रता को कायम रखने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया जो न सिफऱ् रविदास भाईचारे के लिए बल्कि दुनिया भर में बसते सिखों और पंजाबियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मंदिर को गिराए जाने से न सिफऱ् पंजाब बल्कि अन्य स्थानों पर भी भाईचारे में गंभीर बेचैनी पैदा हो सकती है। इस कारण श्री गुरु रविदास जी के साथ सम्बन्धित इस पवित्र स्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक संबंधों बारे सबूत और कानूनी प्रमाण के संदर्भ में दिल्ली विकास अथॉरिटी सहित अन्य सम्बन्धित पक्षों को विश्वास में लेकर इस मसले को तत्काल तौर पर सुलझाना ज़रूरी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मसले की संवेदनशीलता और गंभीरता को समझते हुए यह बहुत ज़रूरी है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार की तरफ से इस स्थान के मूल ढांचे और रूप-रेखा को बहाल करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जाएँ।इसी दौरान एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने दलित भाईचारे की तरफ से लुधियाना, जालंधर, फगवाड़ा, गुरदासपुर और अमृतसर में किये प्रदरशनों के दौरान मामले का नोटिस लिया जहाँ विभिन्न राज्य राजमार्गों को रोका गया जिससे राहगीरों को परेशानी हुई।श्री गुरु रविदास साधू सम्प्रदाय सोसायटी के चेयरमैन संत मोहिंदर पाल पंडवा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर -फगवाड़ा रोड पर गाँव चक्क हकीम के नज़दीक शिरोमणि गुरू रविदास मंदिर के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग -1 पर भी यातायात रोका।

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