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भारत के लिए एतिहासिक पल, इसरो ने ‘चंद्रयान-2’ का किया सफल प्रक्षेपण
अंतरिक्ष की दुनिया में हिंदुस्तान ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO ने आज दोपहर 2.43 मिनट पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-2 को लॉन्च किया। चांद पर कदम रखने वाला ये हिंदुस्तान का दूसरा सबसे बड़ा मिशन है।ये वो पल था जिसका हर देशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहा था। प्रक्षेपण के पहले ही 130 करोड़ देशवासी और इसरो के वैज्ञानिक धडकनें थामे दो बजकर 43 मिनट का इंतजार कर रहे थे। नियत समय पर अपने पहलुओं में तिरंगा समेटे देश का सबसे ताकतवर रॉकेट – GSLV Mk III M1 जब चन्द्रयान 2 को लेकर उड़ा तो हर देशवासी गर्व से भर उठा। इसके बाद आकाश को चीरता प्रक्षेपण यान चन्द्रमा की ओर चल पड़ा। उम्मीद के मुताबिक प्रक्षेपण के सारे पैरामीटर्स सटीक रहे और चरण दर चरण तालियों के गड़गड़ाहट के बीच भारत की इस महत्वकांक्षी मिशन की सफलता की कहानी बयान कर रहे थे। थोडी ही देर में इसरो प्रमुख ने चेहरे पर मुस्कान के साथ ही देश को इसके सफल प्रक्षेपण की खुशखबरी देते हुए कहा कि चंद्रमा की ओर यह भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है। श्रीहरि कोटा के सतीश धवन केन्द्र से प्रक्षेपित करने के करीब 16 मिनट के बाद GSLV Mk III M1 ने पृथ्वी नियत कक्षा में चन्द्रयान को स्थापित करने बाद मिशन का प्रारंभिक चरण पूरा हुआ। इसके बाद चन्द्रयान चन्द्रमा की ओर बढ चलेगा। अगले 48 दिन में साढे तीन लाख किलोमीटर से ज्यादा की की दूरी तय करते हुए ये 7 सितंबर तक अपने लक्ष्य तक पहुंचेगा। प्रक्षेपण के साथ ही बधाइयों का तांता लग गया। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तमाम कैबिनेट मंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसरो की पूरी टीम को बधाई दी। “श्रीहरिकोटा से चन्द्रयान-2 का ऐतिहासिक प्रक्षेपण हर भारतीय के लिए एक गर्व का क्षण है। भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई। मेरी कामना है कि टेक्नॉलॉजी के नए-नए क्षेत्रों में ‘इसरो’, नित नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।”पीएम मोदी ने इस एतिहासिक सफलता पर कहा कि – “एक विशेष क्षण जिसने हमारे गौरवशाली इतिहास को रचा । चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण हमारे वैज्ञानिकों और 130 करोड़ भारतीयों के विज्ञान के नए स्तरों को बढ़ाने के संकल्प को दर्शाता है। आज हर भारतीय को गर्व है”पीएम मोदी खुद अपने ऑफिस में इस मिशन पर नजदीकी से निगाह बनाए हुए थे। वो पूरे प्रक्षेपण को टीवी पर देख रहे थे और इसके सफल होते ही उन्होंने तालियां बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया। बाद में उन्होंने वैज्ञानिकों से बात की और उन्हें पूरे देश की ओर से बधाई दी। संसद के दोनों सदनों में भी देश की इस सफलता की जानकारी दी गयी और इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी गयी।3,850 किलोग्राम वजनी ‘चंद्रयान-2’ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जहां अब तक कोई देश नहीं गया है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 के 3 हिस्से हैं.. लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर। लैंडर को विक्रम नाम दिया गया है जबकि रोवर को प्रज्ञान कहा गया है । चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। ऑर्बिटर और लैंडर धरती से सीधे संपर्क करेंगे लेकिन रोवर सीधे संवाद नहीं कर पाएगा। रोवर सोलर एनर्जी से चलेगा और अपने 6 पहियों की मदद से चांद की सतह पर घूम-घूम कर मिट्टी और चट्टानों के नमूने जमा करेगा। ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाना शुरू कर देगा और इसके बाद लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर उतरेगा और वहां की छानबीन करेगा। लैंडिंग के बाद लैंडर से रोवर बाहर आएगा फिर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल पड़ेगा।