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क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होंगे सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले

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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले अब देश की अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होंगे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की मौजूदगी में इस सुविधा की 17 जुलाई से औपचारिक तौर पर शुरुआत हो गई. शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के फैसले असमिया, हिंदी, कन्नड़, मराठी, ओडिया और तेलुगु समेत नौ भाषाओं में उपलब्ध होंगे.राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों को क्षेत्रीय भाषाओं में भी मुहैया कराए जाने का विचार रखा था. इस पहल के तहत सुप्रीम कोर्ट के 100 फ़ैसलों की नौ भाषाओं में अनुवाद की प्रति राष्ट्रपति को सौंपी गई. राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है और कोशिश की जानी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सभी अहम फैसलों का ज़्यादा से ज़्यादा क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद उपलब्ध हो.बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने सुप्रीम कोर्ट के विस्तार परिसर का उद्घाटन भी किया. 12.19 एकड़ में बनी इस नई इमारत में पांच ब्लॉक हैं, जिसे भूमिगत रास्ते के जरिए पुरानी इमारत से जोड़ा गया है. सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक काम, मुकदमों की फाइलिंग, कोर्ट के आदेशों की कापियां लेने आदि सभी काम इस नई बिल्डिंग में होंगे. इसकी लागत 885 करोड़ रुपये आई है.
नए विस्तार परिसर की ख़ासियत
इससे 1,400 किलोवॉट सौर उर्जा तैयार की जाएगी. जो इसकी ऊर्जा ज़रूरत का लगभग 40 फ़ीसदी है. दिल्ली-एनसीआर में इतनी ज्यादा मात्रा में सोलर पॉवर पैदा करने वाली अभी तक कोई भी सरकारी इमारत नहीं है. इसमें 825 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इस इमारत में रेन वाटर हार्वेस्टिंग से एक लाख लीटर पानी का संचय किया जा सकता है.

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