पंजाब

सीबीआई द्वारा बरगाड़ी मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर सुखबीर बादल मगरमच्छ के आंसू बहाना बंद करे-सुखजिन्दर सिंह रंधावा

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बादल परिवार के पापों का घड़ा भर चुका, सजा भुगतने के लिए तैयार रहें

चंडीगढ़ – सीनियर कांग्रेसी नेता स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा और छह कांग्रेसी विधायकों ने आज अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल को सीबीआई द्वारा बरगाड़ी मामले में क्लोजर रिपोर्ट के मामले में विरोध करने के बयान पर आड़े हाथों लेते हुये नसीहत दी है कि वह मगरमच्छ के आंसू बहाना बंद करे और अपने किये गये पापों के लिए सजा भुगतने के लिए तैयार रहें।स. रंधावा और कांग्रेसी विधायकों स. कुसलदीप सिंह किक्की ढिल्लों, स. हरप्रताप सिंह अजनाला, राजा अमरिन्दर सिंह वडि़ंग, स. बरिन्दरमीत सिंह पाहड़ा, स. फतेहजंग सिंह बाजवा और स. कुलबीर सिंह ज़ीरा ने कहा कि यदि सुखबीर सच्चे दिल से सीबीआई के फ़ैसले का विरोध करता है और श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सर्वोच्च मानते हैं तो वह अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल से केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दिलाएं क्योंकि वह केंद्र सरकार में सत्ता में हिस्सेदार है जिसके अधीन सीबीआई आती है।कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि वास्तव में सीबीआई बादलों को बचाना चाहती है जो बेअदबी मामलों में सीधे तौर पर दोषी हैं और डेरा प्रमुख को माफी दिलाने में उतावले थे। उन्होंने कहा कि बादलों ने डेरा प्रेमियों की वोटें लेने के लिए 2012 में अपनी सरकार के समय डेरा प्रमुख राम रहीम के विरुद्ध बठिंडा कोर्ट में दायर चार्जशीट वापस ले ली थी जो डेरा प्रमुख द्वारा श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी का स्वांग रचाने के मामले में दायर थी।उन्होंने कहा कि दरअसल सुखबीर की हालत उस चतुर बनते चोर जैसी है जो स्वयं चोर होता हुये लोगों की आँखों में धूल डालने के लिए दूसरों की तरफ उंगलियाँ करके चोर-चोर चिल्ला रहा है परन्तु पंजाब के बच्चे-बच्चे को अब यह पता लग चुका है कि डेरा प्रेमियों की वोटों के सहारे अपनी कुर्सी बचाने के लिए बादलों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी कराने का महा पाप किया था। उन्होंने कहा कि यह सुखबीर नहीं बल्कि उस अंदरूनी उन पापों का डर बोल रहा है जिनकी सजा उसे हर हालत में भुगतनी ही पड़ेनी है क्योंकि बादल परिवार के पापों का घड़ा भर चुका है।कांग्रेसी नेताओं ने आगे कहा कि सीबीआई इन केसों के मामलों में कठपुतली का काम कर रही है जो बेअदबी मामलों की जांच के लिए गंभीर नहीं थी। सीबीआई तब हरकत में आई जब आर.एस. खट्टड़ा के नेतृत्व में बनाई पंजाब पुलिस की एसआईटी ने इन मामलों की पैरवी करते हुये मुलजिमों को गिरफ़्तार किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को सीबीआई की नीयत पर पहले ही शक था जिस कारण कोटकपूरा और बहबल कलाँ पुलिस फायरिंग मामले में केस सीबीआई से वापस ले लिए थे। कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि अकाली दल की हिस्सेदार भाजपा द्वारा हरियाणा चुनाव को देखते हुये डेरा प्रमुख को पैरोल देने की तैयारी की जा रही थी जिस पर अकाली दल के कथित पंथक नेताओं ने अपने मुँहों पर ताला लगा लिया था। उन्होंने कहा कि अकालियों का पंथक मुखौटा अब उतर गया है और सुखबीर बादल के मगरमच्छ के आंसू भी अब अकाली दल को सिख कौम की तरफ से बादल परिवार के प्रति नफऱत को दूर नहीं कर सकते।

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