पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा तत्काल आधार पर भरे जाने वाले अहम पदों की पहचान करने के लिए विभागों के लिए 10 दिन की समय-सीमा तय

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अध्यापकों के तबादलों की तजऱ् पर सभी विभागों में ऑनलाईल तबादला नीति लागू करने के आदेश

चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने तत्काल आधार पर भरे जाने वाले अति ज़रूरी पदों की पहचान करके इनकी सूची तैयार करने के लिए विभिन्न विभागों के लिए 10 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग की तजऱ् पर सभी विभागों में ऑनलाइन तबादला नीति लागू करने के भी आदेश दिए।एक अन्य महत्वपूर्ण फ़ैसला लेते हुए मुख्यमंत्री ने गुरदासपुर, तरनतारन और अमृतसर के सरहदी जि़लों के सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में 9वीं, 11वीं और कॉलेज के पहले और दूसरे साल के विद्यार्थियों के लिए एन.सी.सी. का लाजि़मी प्रशिक्षण मुहैया करवाने का पायलट प्रोजैक्ट शुरू करने का भी ऐलान किया। इन जि़लों में 365 हाई स्कूल और 365 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। यह फ़ैसला डी.ई.ओज़ द्वारा वित्त विभाग को पेश किये औपचारिक प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है जिसको कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने तुरंत स्वीकृत करते हुए कहा है कि इसके साथ नौजवानों को हथियारबंद और अर्धसैनिक बलों में रोजग़ार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उनमें अनुशासन की भावना भी पैदा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद यह प्रशिक्षण राज्य के सभी स्कूलों में लाजि़मी बनाया जायेगा। इस सम्बन्ध में ज़रूरी विधि-विधान तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।भर्ती और अन्य अहम मुद्दों संबंधी उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों में खाली पड़े तकरीबन 29 हज़ार पदों को पहले पड़ाव के दौरान और अन्य 15000 दूसरे पड़ाव में भरे जाएँ।इन पड़ावों में अति-ज़रूरी पदों को पहल के आधार पर भरने की महत्ता का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने विभागों को डाक्टरों, नर्सों, अध्यापकों आदि जैसी तकनीकी/हुनरमंद कैडर के पदों को जाँचने के लिए कहा है जहाँ हर साल दो प्रतिशत सेवामुक्ति होती है।मीटिंग के दौरान विभिन्न तौर-तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया जिनमें पुनर्गठन, विभागों के कामकाज को सरल बनाने और अन्य कुशलता लाकर खर्चे घटाने जैसे कदम शामिल हैं। वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल द्वारा दिए सुझाव के जवाब में मुख्यमंत्री ने परसोनल विभाग को छह हफ़्तों के अंदर प्रस्ताव लाने के लिए कहा। उन्होंने विभाग के सचिव को इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव के साथ विचार करने के बाद अंतिम प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा।मुलाजिमों के तबादलों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे अध्यापकों के लिए ऑनलाइन तबादला नीति को सफलता के साथ लागू किया गया है, इसी तरह बाकी सभी विभागों में भी यही नीति लाजि़मी होनी चाहिए जिससे और ज्य़ादा पारदर्शिता लाई जा सके।इस मौके पर वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल के अलावा विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू, अतिरिक्त मुख्य सचिव आवास एवं शहरी विकास विनी महाजन, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य सतीश चंद्र, प्रमुख वित्त सचिव अनिरुद्ध तिवाड़ी, अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारी संस्थाएं विसवाजीत खन्ना, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव गुरकिरत कृपाल सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण कल्पना मित्तल बरुआ, प्रमुख सचिव लोक निर्माण हुसन लाल, प्रमुख सचिव ऊर्जा वेनू प्रसाद, वित्त कमिश्नर वन रौशन सुंकारिया, प्रमुख सचिव ऊच्च शिक्षा सीमा जैन, प्रमुख सचिव योजनाबंदी जसपाल सिंह, सचिव जल सप्लाई और सैनिटेशन जसप्रीत तलवाड़, प्रमुख सचिव पशु पालन राज कमल चौधरी और सचिव रोजग़ार सृजन राहुल तिवाड़ी उपस्थित थे।

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