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डा. हरशिन्दर कौर द्वारा महिलाओं के हकों की आवाज़ बुलंद करने में श्री गुरु नानक देव जी द्वारा निभाई भूमिका संबंधी रौशनी
लैंगनथाल (स्विट्जऱलैंड) – स्विट्जऱलैंड के लैंगनथाल इलाके में हाल ही में एक अंतर धार्मिक सैमीनार और संवाद करवाया गया जिसमें विभिन्न धर्मों के नुमायंदों ने महिलाओं के विरुद्ध दुनिया भर में हो रहे ज़ुल्मों के प्रति गहरी चिंता जताई। इस अवसर पर अपने विचार रखने वाले पैनेलिस्टों में डा. हरशिन्दर कौर, ताई बरनेट, कैरेम आदीगुज़ेल, हीदी रुडौल्फ, डा. रिफात लैनजिऩ और केविन आरिस्टाईड कौरनेलिस शामिल थे।सैमीनार के अवसर पर डा. हरशिन्दर कौर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिखों द्वारा हर क्षेत्र में डाले गए योगदान और ख़ास तौर पर श्री गुरु नानक देव जी द्वारा उस समय के दौरान महिलाओं के हकों के प्रति आवाज़ बुलंद करने संबंधी विस्तार सहित प्रकाश डाला और कहा कि महिलाओं का सम्मान करने का संदेश विश्वभर में प्रचार किया जाना चाहिए। समूह पैनेलिस्टों ने इस विचार पर अपनी सहमती जताई कि आज की नौजवान नसल को महिलाओं के सम्मान और विश्व भाईचारे को बनाए रखने जैसे मुद्दों संबंधी जागरूक किया जाना चाहिए। डा. हरशिन्दर कौर ने संयुक्त राष्ट्र संघ से लिए तथ्यों सहित खुलासा किया कि कैसे 16वीं सदी में सिख महिलाओं को पूर्ण आज़ादी हासिल थी और कैसे उस समय के दौरान इसी कारण महिलाओं के विरुद्ध ज़ुल्म कम थे।इस अवसर पर स्विट्जऱलैंड से डा. कुंदन, अमेरिका से ग्लोबल सिख कौंसिल के संस्थापक मैंबर डा. स्वर्णबीर और डा. गुरप्रीत सिंह ने सभी पैनेलिस्टों का धन्यवाद किया। अंत में पहली बातशाही साहिब श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को मुख्य रखते हुए इस आशय का एक संकल्प भी पास किया गया कि हरेक देश में नौजवानों के ख़ास तौर पर सम्मिलन से एक अंतर धार्मिक संवाद करवाया जायेगा जिससे विश्व भाईचारे और महिलाओं के सम्मान का श्री गुरु नानक देव जी द्वारा दिया गया संदेश दुनिया भर में फैलाया जा सके।