पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा जेलों की सुरक्षा का जायज़ा, सभी जेलों के लिए ड्रोन और सी.सी.टी.वी. के आदेश

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पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस कर्मचारियों को डैपूटेशन पर जेल विभाग में भेजा जाएगा

चंडीगढ़ – पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा जेलों की सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए गुरूवार को सख्त कदम उठाए जाने हेतु लिए गए फ़ैसले के संदर्भ में पंजाब की सभी जेलों में ड्रोन और सी.सी.टी.वी. कैमरे उपलब्ध करवाए जाएंगे। जेल सुरक्षा प्रणाली का जायज़ा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस के साथ सम्बन्धित मुलाजि़मों को जेल विभाग में डैपूटेशन पर भेजने का फ़ैसला किया है जिससे वह ख़ुफिय़ा जानकारी एकत्रित करने के लिए स्टाफ की मदद कर सकें जो कि कड़ी सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए बहुत अहम है। एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुनवाई अधीन गैंगस्टरों और गर्म ख्यालियों को अन्य कैदियों से अलग करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने के लिए भी जेल विभाग को कहा है जोकि उनको राज्य से बाहर दूसरे जेलों में तबदील करने से ही संभव हो सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य जेलों में से गर्म ख्यालियों और आतंकवादियों/गैंग्स्टरों की अपराधिक गतिविधियों को रोकना है। मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमीश्नरों को महीने में एक बार अपने-अपने सम्बन्धित जिलों की जेलों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं जिससे इन जेलों में सुरक्षा प्रबंधों और कल्याण कदमों पर उपयुक्त निगरानी रखने को यकीनी बनाया जा सके। मीटिंग के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि डिप्टी कमीश्नरों को जेलों की कमियों की पहचान करने के लिए निजी तौर पर जांच करने के लिए कहा है और सुरक्षा उपकरणों में दिखाई देती किसी भी तरह की कमी को बिना किसी देरी के पूरा करने को यकीनी बनाने के लिए कहा है। नाभा जेल में बरगाड़ी बेअदबी मामले के मुख्य दोषी की हाल ही में हुई हत्या और लुधियाना जेल में हुए दंगों पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गंभीर नोटिस लिया है। उन्होंने वार्डनों के खाली पड़े 700 पदों को बिना किसी देरी के भरने के निर्देश दिए हैं। हालाँकि सरकार ने पहले ही 400 वार्डनों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनके लिए वित्त विभाग ने मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने बाकी रहते 300 पद भी जल्दी से जल्दी भरने के लिए विभाग को मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने वार्डनों की भर्ती के लिए मौजूदा केवल लिखित परीक्षा कराने के अमल की जगह शारीरिक टैस्ट और शारीरिक टैस्ट के न्यूनतम मापदण्डों को लाजि़मी तौर पर पूरा करने के भी निर्देश दिए हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने जेल मैनुअल का जायज़ा लेने के लिए भी जेल विभाग को हिदायत की है। उन्होंने कैदियों के लिए पैरोल को मुश्किल बनाने के लिए उचित संशोधन करने के लिए कहा है क्योंकि इनको जेलों से बाहर आकर समस्याएँ पैदा करते हुए देखा गया है। आई.आर.बी. के बदले सी.आर.पी.एफ. की चार कंपनियाँ तैनात करने के लिए हाल ही की मीटिंग के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दी गई मंजूरी का जि़क्र करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने जल्दी से जल्दी इस सम्बन्ध में विधि-विधान बनाने के लिए हुक्म दिए हैं। उन्होंने हिदायत की है कि सी.आर.पी.एफ. की कंपनियाँ जितनी जल्दी हो सके जेल ड्यूटी पर तैनात की जाएँ।जेलों में मोबाईल फोनों आदि की तस्करी में पैसको मुलाजिमों की सम्मिलन सम्बन्धी शिकायतों का नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने जेलों में तैनात किये जाने वाले ऐसे सभी मुलाजिमों की जांच-पड़ताल करने के लिए कहा है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कैदियों को उत्पादकता के तौर पर व्यस्त रखने के लिए डिप्टी कमीश्नरों को एन.जी.ओज़ के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा है जिससे यह कैदी जेलों की फ़ैक्ट्रियाँ या एन.जी.ओज़ द्वारा चलाई जाती स्कीमों के हिस्से के तौर पर काम में व्यस्त रहें। मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने मोहाली में एक नयी जेल स्थापित करने के जेल विभाग के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है जिससे दूसरे जेलों पर दबाव और कैदियों की ज़्यादा संख्या को घटाया जा सके। मीटिंग में जेल मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह सतीश चंद्र, डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता, डी.जी.पी. इंटेलिजेंस वी.के. भावरा, डी.जी. जेल रोहित चौधरी, ए.आई.जी. जेल एच.एस. मान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, सचिव पी.डब्ल्यू.डी.(बी एंड आर) हुसन लाल और विशेष सचिव वित्त गरिमा सिंह शामिल थे।

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